नागपुर की अमर स्मृति बहुउद्देशीय एजुकेशन सोसाइटी और अन्य की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
शिक्षक भर्ती से जुड़े प्रस्ताव और दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए।
अदालत ने जांच के लिए शिक्षा उपसंचालक को निर्देश दिए।
अदालत ने 30 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
Nagpur Education Department Fake Documents: नागपुर अमर स्मृति बहुउद्देशीय एजुकेशन सोसाइटी तथा अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश प्रवीण पाटिल ने शिक्षक भर्ती से जुड़े इस मामले में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षा उपसंचालक को जांच के आदेश दिए।
अदालत ने कहा कि शिक्षा अधिकारी द्वारा शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव को क्या वास्तव में याचिकाकर्ता प्रबंधन ने शिक्षा अधिकारी के कार्यालय को भेजा था, शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में प्रविष्टियां विधिवत दर्ज की गई थीं या नहीं और प्रस्ताव के साथ संलग्न दस्तावेजों की प्रामाणिकता की भी पुष्टि करने के आदेश दिए।
इस संदर्भ में विस्तृत रिपोर्ट 30 नवंबर तक प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए। याचिकाकर्ता प्रबंधन का दावा है कि वर्ष 2009 में प्रतिवादी-कर्मचारी की नियुक्ति स्कूल के गैर-अनुदान प्राप्त वर्ग में अस्थायी पद पर की गई थी लेकिन उसके तुरंत बाद उसने स्कूल छोड़ दिया - और रौरंध अपर प्राइमरी स्कूल, चैतन्य नगर, नारी में जुलाई 2009 से मई 2010 तक तथा जुलाई 2010 से सितंबर 2011 तक सेवाएं दीं।
प्रबंधन का कहना है कि चूंकि कर्मचारी स्कूल में नियुक्त नहीं थी, इसलिए सेवा समाप्ति का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। इसके विपरीत, कर्मचारी ने स्कूल ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील दायर करते हुए दावा किया कि उसकी नियुक्ति विधि के अनुसार उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई थी, जिसके लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया।
साक्षात्कार आयोजित किया गया और सोसाइटी का प्रस्ताव पारित किया गया। इस विवाद के आलोक में अदालत ने 10 दिसंबर 2024 को याचिकाकर्ता प्रबंधन और शिक्षा अधिकारी को तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया था।
इसके पालन में शिक्षा अधिकारी ने 18 दिसंबर 2024 को एक शपथ पत्र के साथ उस प्रस्ताव को प्रति दायर की, जो उनके अनुसार याचिकाकर्ता ने उनके कार्यालय को भेजा था। इसमें सोसाइटी का प्रस्ताव और विज्ञापन की प्रति सहित सभी संबंधित दस्तावेज संलग्न थे।
इसके बाद याचिकाकर्ता प्रबंधन ने 23 कनवरी 2025 की शपथ पत्र दायर करते हुए कहा कि अनुमोदन के लिए के संत से प्रकाशित किया था प्रबंधन के अनुसार समाचार पत्र वर्ष 2003 की प्रतीत होता है।
जैसा कि उसी पत्र के साथ लगे विज्ञापन से देखा जा सकता है, जबकि प्रतिवादी कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2000 की यह दस्तावेज संदिग्ध रूप से बनाया गया प्रतीत होता है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता प्रबंधन ने यह भी कहा बार शिक्षा अधिकारी के मध्यम से रिर्ट पर आए है।