Nagpur Sugar Price Hike: नागपुर त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही मिठास महंगी होने लगी है। शक्कर के दाम में बीते एक महीने में प्रति किलो करीब 12 रुपए की तेजी आने से अब मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ने की आशंका है। इथेनॉल नीति के तहत चीनी के इस्तेमाल और त्योहारी मांग बढ़ने से शक्कर की कीमत में तेजी आई है। शहर के थोक बाजार में शक्कर का भाव 5,850 से 5,900 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
व्यापारियों के अनुसार पिछले एक महीने में शक्कर की कीमत में करीब 1,650 रुपए की तेजी आई है। खुदरा बाजार में एक महीने पहले 50 रुपए किलो बिकने वाली शक्कर अब 61 से 62 रुपए किलो तक पहुंच गई है। महज 30 दिनों के भीतर शक्कर के दाम में प्रति किलो 12 रुपए तक की बढ़ोतरी से गृहिणियों का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। आगे कई बड़े त्योहार आने वाले हैं, ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है की त्योहारों पर मिठाई महंगी होगी।
शक्कर के दामों में आई इस अचानक तेजी के पीछे मुख्य रूप से 2 बड़े कारण सामने आ रहे हैं। स्थानीय किराना व्यापारियों के अनुसार इथेनॉल नीति और त्योहारी मांग से बाजार में बढ़ी गर्माहट के कारण शक्कर के दाम में यह तेजी आई है। सरकार द्वारा गन्ने के रस और शीरे का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए बढ़ाने के फैसले का सीधा असर चीनी के उत्पादन और उसकी उपलब्धता पर पड़ा है। मिलों से बाजार में आने वाली शक्कर की आपूर्ति नियंत्रित होने के कारण थोक कीमतों में उछाल आया है। आने वाले दिनों में गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों रहेंगे।
ऐसे में बाजार में शक्कर की मांग अचानक काफी बढ़ गई है। सप्लाई चेन और नीतिगत बदलावों का असर अब सीधे खुदरा बाजार पर दिख रहा है। पिछले एक महीने के भीतर शक्कर के थोक और खुदरा दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है और भाव 12 रुपए प्रति किलो तक बढ़ चुके है। सरकार की इथेनॉल नीति के चलते शक्कर की उपलब्धता और आगामी त्योहारी मांग को देखते हुए यदि मिलों से आवक की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कीमतें और ऊपर जा सकती है।
-अनिल अग्रवाल, शक्कर व्यापारी
शक्कर के महंगे होने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ हलवाई, मिठाई दुकानदारों, बेकरी संचालकों और चाय-नाश्ते की दुकानों का बजट भी प्रभावित हो रहा है। नागरिकों का कहना है कि त्यौहारों से पहले बाजार में जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा उचित कदम उठाना चाहिए। आगे कई बड़े त्योहार आने वाले है, शक्कर की कीमत पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आम नागरिकों के लिए पाँ का उत्साह मनाना महंगा हो जाएगा।