Vandana Devikar Injury Case: नागपुर से एक बेहद हृदयविदारक और प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली खबर सामने आई है। शहर की मानवीय बस्तियों में आवारा जानवरों का आतंक किस कदर जानलेवा साबित हो रहा है, इसका शिकार 64 वर्षीय बुजुर्ग महिला वंदना देवीकर बनी हैं। 27 जनवरी की सुबह जब वे अपने घर के बाहर झाड़ू लगा रही थीं, तब एक खूंखार आवारा बैल ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। आज एक महीना बीत जाने के बाद भी वंदना जी की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और वे घर पर ही चिकित्सा उपकरणों के सहारे 'कोमा' जैसी स्थिति में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही हैं।
इस घटना ने नागपुर नगर निगम (NMC) की कार्यप्रणाली और नागरिकों की सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हमलावर बैल अब भी उसी इलाके में खुलेआम घूम रहा है, लेकिन प्रशासन ने अब तक इसकी सुध नहीं ली है।
27 जनवरी की सुबह करीब 7:30 बजे हुए इस हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बैल के सींग वंदना देवीकर की जांघ में गहरे धंस गए थे। हमले में उनकी छाती की पसलियां टूट गईं और मस्तिष्क में गंभीर आंतरिक चोटें आईं। उन्हें तत्काल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों को उनके जीवन को बचाने के लिए मस्तिष्क की एक बड़ी सर्जरी करनी पड़ी। सर्जरी के दौरान उनकी खोपड़ी का एक हिस्सा तक निकालना पड़ा, लेकिन दुर्भाग्यवश एक महीना बीतने के बाद भी उन्होंने न तो आंखें खोली हैं और न ही कोई प्रतिक्रिया दी है।
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देवीकर परिवार के लिए सबसे ज्यादा पीड़ादायक बात प्रशासन का उदासीन रवैया है। एक महीना बीत जाने के बाद भी नगर निगम के किसी अधिकारी या स्थानीय पार्षद ने परिवार से संपर्क करना जरूरी नहीं समझा। पुलिस की भूमिका भी केवल औपचारिकता तक सीमित रही है, जहाँ उन्होंने केवल घटना के समय के खून से सने कपड़े जब्त किए हैं। परिवार ने इलाज पर लाखों रुपये खर्च कर दिए हैं और अब वंदना जी घर पर कृत्रिम ऑक्सीजन और मेडिकल उपकरणों के सहारे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र इस पूरी त्रासदी से अनजान बना हुआ है।
अव्हाणे शिवारा और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना के बाद से दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस आवारा बैल ने वंदना देवीकर को इस स्थिति में पहुँचाया, वह आज भी गलियों में आवारा घूम रहा है। बच्चों और बुजुर्गों ने डर के मारे घर से निकलना कम कर दिया है। नागरिकों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? लोगों की मांग है कि नगर निगम तुरंत आवारा जानवरों को पकड़ने का अभियान चलाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान करे।