Nagpur Storm Water Drain Project: नागपुर शहर में विश्व बैंक के सहयोग से सार्वजनिक निर्माणकार्य विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा चलाए जा रहे स्टॉर्म वाटर ड्रेन प्रोजेक्ट में भारी तकनीकी खामियां उजागर हुई हैं। 28 जुलाई 2026 को शहर में हुई भारी बारिश और उसके कारण जलभराव को लेकर मचे हाहाकार के बाद महानगर पालिका की स्थायी समिति की सभापति और प्रन्यास की विश्वस्त शिवानी दाणी ने पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर इस पूरी परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
यहां तक कि अब यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने की जानकारी भी सूत्रों ने दी। मुख्य अभियंता को लिखे गए पत्र में प्रताप नगर यूनियन बैंक से लंदन स्ट्रीट तक डाले जा रहे स्टॉर्म वाटर ड्रेन की तकनीकी योजना को कठघरे में खड़ा किया गया है।
1. उल्टी दिशा से शुरू किया गया काम तकनीकी रूप से जल निकासी का काम निचले हिस्से यानी 'डाउनस्ट्रीम' (नाले की तरफ) से शुरू होना चाहिए था ताकि बारिश का पानी आसानी से निकल सके लेकिन पीडब्ल्यूडी ने इस प्रोजेक्ट का काम बीच से ही शुरू कर दिया जो कि 28 जुलाई को जलभराव का एक बड़ा कारण बना, सभापति ने पूछा है कि ऐसा अतार्किक निर्णय क्यों लिया गया?
2. आस-पास के क्षेत्रों की अनदेखी यह ड्रेन मुख्य रूप से राधे मंगल सभागृह से लंदन स्ट्रीट नाले तक अतिरिक्त बारिश के पानी को ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है लेकिन सोमलवार स्कूल से लगे हुए आस-पास के क्षेत्रों में होने वाली बारिश के पानी की निकासी के लिए इस योजना में क्या प्रावधान किए गए हैं, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
3. मौजूदा जनसुविधाओं पर खतरा गलियों के अंदर बची हुई स्टॉर्म वाटर ड्रेन लाइन बिछाने की योजना है। सभापति ने चिंता जताई है कि संकरी गलियों में पहले से मौजूद पानी की पाइपलाइन, घरों के कनेक्शन, 1000 मिमी की सीवर लाइन और बिजली के केबलों को नुकसान पहुंचाए बिना यह काम कैसे पूरा किया जाएगा? अगर इन बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचता है तो इस नए ड्रेन का क्या उद्देश्य रह जाएगा?
स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी द्वारा पीडब्ल्यूडी को भेजे गए इस पत्र की प्रति महापौर, मनपा आयुक्त और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचई) के अधीक्षक अभियंता को भी सूचनार्थ भेजी गई है। पत्र में स्पष्ट कर दिया है कि करोड़ों रुपये के इस ड्रेनेज प्रोजेक्ट में बिना उचित तकनीकी नियोजन के काम किया जा रहा है जिसका खामियाजा सिटी की जनता को मानसून के दौरान भुगतना पड़ा।
सबसे बड़ा तकनीकी सवाल इस स्टॉर्म चाटर ड्रेन के "आउटफॉल' (अतिम निकास) को लेकर है, जानकारी के अनुसार जहां इस ड्रेन का पानी छोड़ा जाना प्रस्तावित है वहां पहले से 1200 मिमी की चालू सीवर लाइन मौजूद है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों के साथ हुई चर्चा में यह बात सामने आई कि नई ड्रेन लाइन को मौजूदा सीवर लाइन के नीचे से ले जाने की योजना है।
सभापति ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए तकनीकी आंकड़े पेश किए हैं कि नाले के तल का स्तर 296.29 मीटर है और मौजूदा सीवर लाइन का इनवर्ट 297.45 मीटर है। ऐसे में इस पाइप का निचला हिस्सा किस स्तर पर रखा जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है।