Nagpur Smart Meter Confusion: नागपुर स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर उपभोक्ताओं के मन में चल रहे डर और असमंजस पर बिजली विभाग की ओर से खुलासा किया गया कि स्मार्ट मीटर को लेकर संभ्रम है। फिलहाल प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है। इसके स्थान पर पोस्टपेड मीटर ही लगाए जा रहे हैं किंतु नियमों के अनुसार अब पुराने मीटर बदलना अनिवार्य है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकार और बिजली विभाग प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं पर 'प्रीपेड' (Prepaid) स्मार्ट मीटर थोपा नहीं जा रहा है। हालांकि उपभोक्ता अपने पुराने मीटर को नए स्मार्ट मीटर से बदलने से इनकार नहीं कर सकते क्योंकि तकनीकी अपग्रेडेशन और मीटर बदलना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
अदालत में याचिकाकर्ता ने उपभोक्ताओं को मिल रहे उन संदेशों पर चिंता जताई थी जिनमें 48 घंटे के भीतर स्मार्ट मीटर लगाने की बात कही गई थी। उपभोक्ताओं का मुख्य डर यह था कि यदि प्रीपेड मीटर लगा दिया गया तो बैलेंस खत्म होने पर धारा 56 के तहत बिना किसी पूर्व सूचना के उनकी बिजली तुरंत काट दी जाएगी। इस पर बिजली विभाग की ओर से अदालत में साफ किया गया कि वर्तमान में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अनिवार्य रूप से 'प्रीपेड' नहीं हैं और इन्हें 'पोस्टपेड' मोड पर ही संचालित किया जा रहा है। प्रीपेड सुविधा केवल उन उपभोक्ताओं के लिए होगी जो अपनी मर्जी से इसे चुनेंगे। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि किसी कारणवश बिजली काटनी भी पड़ी तो उपभोक्ताओं को 15 दिन का पूर्व नोटिस दिया जाएगा, जैसा कि मौजूदा पोस्टपेड मीटरों के मामले में किया जाता है।
भले ही प्रीपेड सिस्टम चुनना उपभोक्ताओं के हाथ में हो लेकिन उन्हें अपना पुराना मीटर बदलकर नया स्मार्ट मीटर लगवाना ही होगा, सुनवाई में बताया गया कि इलेक्ट्रसिटी एक्ट (Electricity Act) और सेंट्रल इलेक्ट्रसिटी अथॉरिटी एक्ट के प्रावधानों के तहत मीटरों का रिप्लेसमेंट पूरी तरह अनिवार्य है।
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कुल 2 करोड़ 44 लाख मीटर बदले जाने का लक्ष्य है जिनमें से 1 करोड़ 21 लाख मीटर पहले ही बदले जा चुके हैं और यह प्रक्रिया 2023 से लगातार जारी है। अदालत ने भी स्पष्ट किया कि उपभोक्ता किसी उन्नत तकनीक वाले नए मीटर को लगाने से प्रशासन को नहीं रोक सकते, कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो उपभोक्ता को अपना मौजूदा मीटर बदलने से इनकार करने का विकल्प देता हो।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि यह स्मार्ट मीटर लगाने की पहल भारत सरकार की एक बड़ी योजना का हिस्सा है जिसके लिए लगभग 29,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। फिलहाल सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर का ढांचा तैयार करना है और आम जनता की सुविधा के लिए इसमें पोस्टपेड व्यवस्था ही लागू रखी गई है।