यवतमाल: स्मार्ट मीटर के विरोध में फूटा दिग्रसवासियों का गुस्सा, सहमति के बिना मीटर लगाने पर जताई आपत्ति

Smart Meter Protest in Yavatmal's Digras : दिग्रस में नागरिकों ने महावितरण कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उपभोक्ताओं ने लिखित सहमति के बिना मीटर लगाने पर आपत्ति जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
Digras Smart Meter Protest Mahavitaran Consumer Consent
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
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Smart Meter Protest In Yavatmal District: यवतमाल के दिग्रस शहर में महावितरण द्वारा उपभोक्ताओं की लिखित अनुमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में जनआक्रोश देखने को मिला। 'आम्ही दिग्रसकर' संगठन के नेतृत्व में सैकड़ों नागरिक महावितरण कार्यालय पहुंचे और इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए संबंधित अधिकारियों को निवेदन सौंपा।

उपभोक्ताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि ग्राहकों के अधिकारों का हनन करने वाला कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने महावितरण के कार्यकारी अभियंता को ज्ञापन देकर मांग की कि बिना स्पष्ट और लिखित सहमति के किसी भी उपभोक्ता के घर स्मार्ट मीटर न लगाया जाए। निवेदन में कहा गया कि दिग्रस क्षेत्र के नागरिकों को पहले से ही नियमित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है। ऐसे में स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता को परेशान करना उचित नहीं है। संगठन का कहना है कि सबसे पहले बिजली वितरण व्यवस्था की कमियों को दूर कर उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा उपलब्ध कराना महावितरण की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सूचना प्रक्रिया और नियमों पर उठाए सवाल

संगठन के अनुसार, वर्तमान में एसएमएस और व्हॉट्सऐप के माध्यम से केवल 48 घंटे की सूचना देकर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली और नियमों के विपरीत है। निवेदन में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने स्मार्ट मीटर को अनिवार्य करने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए हैं।

संगठन ने बंबई उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका का हवाला देते हुए कहा कि ग्राहकों की लिखित सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाए जाने के मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। साथ ही विद्युत अधिनियम 2023 की धारा 55 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि मीटर बदलने से पहले कम से कम 15 दिन पूर्व लिखित सूचना देना आवश्यक है।

प्रीपेड व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर बोझ

नागरिकों ने आशंका जताई कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। इसलिए उपभोक्ताओं को पोस्टपेड अथवा प्रीपेड मीटर चुनने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाए गए तो दिग्रस शहर बंद आंदोलन किया जाएगा।

इस दौरान दिगरस के मेयर पंचशीला वाल्मीक इंगोले, पूर्व मेयर रविंद्र अरगडे, अजिंक्य मात्रे, सैयद अक्रम, नगरसेवक बिलाल मिरवाले, नगरसेवक गफ्फार शेख, रमजान पटेल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा 'आम्ही दिग्रसकर' संगठन के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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