नागपुर शंकरनगर विवाद,(सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

Nagpur High Court: नागपुर में फूड जॉइंट्स विवाद, देर रात शोर-शराबे और अवैध प्रतिष्ठानों पर हाई कोर्ट की सख्ती

Nagpur High Court PIL: नागपुर के शंकरनगर क्षेत्र में अवैध प्रतिष्ठानों और हुड़दंग को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। नाले पर अवैध निर्माण और पुलिस की निष्क्रियता पर भी चिंता जताई गई।

अंकिता पटेल

Nagpur High Court Law and Order Issue: नागपुर शहर के अलग-अलग हिस्सों के साथ ही विशेष रूप से शंकरनगर परिसर में फूड जॉइंट्स, रेस्टोरेंट्स और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों के कारण आम नागरिकों को हो रही परेशानी को लेकर ललित हारोडे ने हाई कोर्ट में फौजदारी जनहित याचिका दायर की। याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने देर रात तक इस परिसर में होने वाले हुड़दंग पर कड़ी आपत्ति जताई।

शहर में बिना अनुमति के चल रहे अवैध प्रतिष्ठानों और देर रात तक होने वाले हुड़दंग के कारण उत्पन्न कानून-व्यवस्था के संकट पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। शंकरनगर और बजाजनगर के बीच नाले पर किए गए अवैध निर्माण और पुलिस प्रशासन की निष्क्रयता को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता व्यक्त की।

तड़के 3 बजे भी रहता है दिन जैसा नजारा

अदालत में सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि जिन प्रतिष्ठानों को रात 1 बजे तक बंद हो जाना चाहिए, वे धड़ल्ले से खुले रहते हैं। एक न्यायाधीश ने स्वयं देर रात इस क्षेत्र का दौरा किया और पाया कि तड़के 3 बजे भी वहां इतनी भीड़ और गाड़ियां मौजूद थीं जैसे सुबह के 8 या 9 बज रहे हों। ये सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना किसी वैध निर्माण अनुमति या संचालन लाइसेंस के चलाए जा रहे हैं।

नाले पर अवैध कब्जा कर बनाए गए रास्ते

मामले में सबसे बड़ा उल्लंघन शंकरनगर और बजाजनगर के बीच अंतिम चौराहे के पास स्थित एक नाले पर देखा गया है। याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अक्षय नाईक ने अदालत को तस्वीरों के माध्यम से बताया गया कि कई प्रतिष्ठान मालिकों ने नाले पर अवैध -रूप से स्लैब डालकर निजी पहुंच मार्ग बना लिए हैं जिससे पानी का प्राकृतिक बहाव भी पूरी तरह से बाधित हो गया है।

NMC और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान यह स्पाट किया गया कि चूंकि नए नियमों के तहत 'ईटिंग हाउस' (भोजनालय) के लिए पुलिस लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती (जब तक कि वे अवैध शराब न परोस रहे हों), इसलिए इन अवैध प्रतिष्ठानों पर नकेल कसने और कार्रवाई करने की मुख्य जिम्मेदारी पुलिस और मनपा की है। अधि. नाईक ने यह सुझाव दिया गया कि मनपा को तुरंत उचित कदम उठाते हुए इन अवैध कब्जों को ध्वस्त करना चाहिए और नाले के पास एक 'रिटेनिंग कंपाउंड वॉल' (सुरक्षा दीवार) का निर्माण करना वाहिए।

पुलिस प्रशासन को फटकार

कानून और व्यवस्था की बिगडती स्थिति पर न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को भी आड़े हाथों लिया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस इस मुद्दे पर सो रही है और उन्हें इन अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल उचित कदम उठाने चाहिए, न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

गत समय अदालत का मानना था कि इन अवैध और परेशान करने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ ठोस और आवश्यवा कार्रवाई की जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा था कि उत्तरदाताओं (अधिकारियों) को नोटिस जारी होने के बाद भी यदि यह उपद्रव जारी रहता है तो यह स्थिति से निपटने में अधिकारियों की काबिलियत पर एक बड़ा संदेह पैदा करेगा।

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