नागपुर, आरटीई, निजी स्कूल,प्रतीकात्मक तस्वीर(सोर्स: सौजन्य AI) 
नागपुर

नागपुर RTE एडमिशन विवाद: निजी स्कूलों की हताशा के बाद झुकी सरकार, 62.85 करोड़ के फंड से जारी हुई पहली किस्त

Nagpur RTE Schools: नागपुर में आरटीई के तहत फीस प्रतिपूर्ति न मिलने से जूझ रहे निजी स्कूलों को राहत मिली है। सरकार ने 25 फीसदी आरक्षित सीटों के लिए 8 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

अंकिता पटेल

Nagpur RTE Fee Reimbursement: नागपुर शहर में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में फीस की वापसी न होने के कारण स्कूलों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा था। कुछ स्कूलों ने इस वर्ष प्रवेश न देने का रुख अपनाया था।

अंततः सरकार ने इस संबंध में 8 करोड़ रुपये राशि स्वीकृत कर दी है। बता दें कि नागपुर जिले के 300 से अधिक निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों ने अपनी हताशा जाहिर की है। स्कूलों का कहना है कि आरटीई के तहत आने वाले बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए? 3 साल से एक भी रुपया नहीं मिला है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार के 9 जून 2026 के फैसले के अनुसार, आरटीई के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति हेतु स्वीकृत 62.85 करोड़ रुपये में से 8 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सरकार द्वारा इस धनराशि के वितरण का निर्णय लिया गया। जिले में हर साल करीब 7,000 छात्र आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लेते हैं। 2023-24, 2024-25 और 2025-26 इन 3 वर्षों के बकाया शुल्क प्रतिपूर्ति के कारण स्कूल आर्थिक रूप से टूट चुके थे। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, जिले का कुल बकाया लगभग 11 से 12 करोड़ रुपये है। ऐसे में स्वीकृत किए गए 8 करोड़ रुपये से बकाया राशि का 70 प्रतिशत निपटारा हो जाएगा।

शिक्षा विभाग 'मिशन मोड' में

सरकार ने 31 मार्च 2027 से पहले सभी खर्चों का विवरण देते हुए उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया है, इसलिए जिला परिषद शिक्षा विभाग को अब 'मिशन मोड' में काम करना होगा।21 अगस्त 2019 के परिपत्र के अनुसार प्रत्येक दावे का सत्यापन किया जाएगा जिससे धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा।

अदालती मामलों का निपटारा

कई स्कूलों ने फीस वापसी के लिए नागपुर बेंच में याचिकाएं दायर की थीं। 8 करोड़ रुपये के फंड ने इन मामलों के निपटारे का रास्ता खोल दिया है। 9 जून के सरकारी आदेश के साथ नागपुर के आरटीई छात्रों और स्कूलों दोनों को 'संजीवनी' मिल गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह राशि स्कूलों के बैंक खातों में कब जमा होगी।

शहर के स्कूलों पर भी बकाया

लगभग 300 विद्यालयों पर बकाया है। इनमें शहर के धरमपेठ, मपेठ, रामदासपेठ, लक्ष्मीनगर, सदर के प्रसिद्ध कॉन्वेंट और सीबीएसई विद्यालय तथा कामठी, हिंगना, कलमेश्वर और पारशिवनी तालुकाओं के ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे निजी विद्यालय शामिल हैं।

ये स्कूल मंजूर की गई निधि से लाभान्वित होंगे। सहायता प्राप्त विद्यालयों को यह लाभ नहीं मिलेगा। वहीं आरटीई की 2026-27 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। शुल्क प्रतिपूर्ति राशि उपलब्ध होने से हजारों वंचित बच्चों के लिए प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

आंकड़े पर एक नजर

  • कुल बकाया राशि 62.85 करोड़ रुपये।
  • जिले का बकाया 11 से 12 करोड़ रुपये।
  • जिले के लिए स्वीकृत राशि - 8 करोड़।
  • जिले में कुल गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या 300।
  • आरटीई के अंतर्गत जिले में प्रवेश 6 से 7 हजार।

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