नागपुर सड़कें, हाई कोर्ट, मनपा, जनहित याचिका, (सोर्स: सौजन्य AI) 
नागपुर

सिर्फ नोटिस नहीं, काम चाहिए: नागपुर की सड़कों पर हाई कोर्ट सख्त, मनपा को लगाई कड़ी फटकार

Nagpur Roads News: नागपुर की खराब सड़कों को लेकर हाई कोर्ट ने मनपा को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं, सड़क सुधार के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है।

अंकिता पटेल

Nagpur High Court News: नागपुर शहर की खस्ताहाल सड़कों को लेकर महानगरपालिका को हाई कोर्ट की नाराजगी झेलनी पड़ी। कोर्ट ने ठेकेदारों के प्रति मनपा के सुस्त रवैये को लेकर कड़ी फटकार लगाई, सोमवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मनपा को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सड़कों की मरम्मत के लिए ठेकेदारों को महज नोटिस जारी कर देना ही काफी नहीं है।

सिटी की सड़कों को लेकर जनमंच द्वारा नागपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील मिजां ने अदालत को बताया कि अदालत द्वारा पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद प्रशासन ने सड़कों के सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

सड़कों की मरम्मत में देरी पर हाईकोर्ट सख्त

अदालत का ध्यानाकर्षित करते हुए याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि इससे ठीक एक माह पहले हुई सुनवाई में मनपा के वकील जेमिनी कासट और अन्य प्रतिवादियों के वकील कुंटे ने अदालत को आश्वस्त किया था कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सड़कों पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएंगे लेकिन एक महीने का समय बीतने के बाद भी काम न होने पर अदालत ने सख्ती दिखाई। जब मनपा के वकील ने यह तर्क दिया कि उन्होंने ठेकेदारों को नोटिस जारी कर दिए हैं और कुछ काम शुरू भी हो गया है तो अदालत ने इस पर गहरी असहमति जताई। अदालत ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हम मनपा की दलीलों से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि एक महीने का समय पहले ही बीत चुका है। केवल नोटिस जारी करना और थोड़ा-बहुत काम कर देना पर्याप्त अनुपालन नहीं माना जाएगा।

2 दिनों में मांगा जवाब

अन्य प्रतिवादियों की पैरवी कर रहे अधि, कुंटे ने अदालत में दावा किया कि उनके प्राधिकरण ने अदालत के आदेश का पूरी तरह से पालन कर लिया है। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए नागपुर मनपा और अन्य संबंधित अधिकारियों को 2 दिनों के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है जिसमें 8 मई 2026 के आदेश के अनुपालन का पूरा ब्योरा हो।

अदालत ने कहा है कि इन हलफनामों की प्रतियां याचिकाकर्ता को एडवांस में उपलब्ध कराई जाएं। हलफनामा मिलने के बाद याचिकाकर्ता जमीनी तथ्यों की जांच करेगा और उसके बाद ही अदालत के समक्ष अपना उचित बयान दर्ज कराएगा।

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