Ram Kadam Targets Uddhav Thackeray Over Disha Salian Case: दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश देने के बाद सियासत गरमा गयी हैं। राम कदम ने कहा कि एक पिता ने अपनी बेटी को खो दिया है। तो सबसे पहले किसकी बात सुनी जानी चाहिए? क्या हमें उन माता-पिता की बात सुननी चाहिए या दूसरे लोगों की? दिशा सालियान के पिता खुलकर कह रहे हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस मामले को दबा दिया था।
राम कदम ने कहा कि केवल इसलिए कि दिशा के पिता एक आम नागरिक हैं, उन्हें न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। उद्धव ठाकरे किसे बचाने की कोशिश कर रहे थे? उन्होंने इसे क्यों दबाया? वही, उम्मीद जताई कि न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद दिशा सालियान के परिवार को उचित न्याय मिलेगा। उन्होंने मामले में आदित्य ठाकरे का नाम सामने आने का भी दावा किया और न्यायपालिका से गुहार लगाई है। न्यायपालिका दिशा सालियान के परिवार को उचित न्याय दिलाएगी।
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने अपनी याचिका में बेटी की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने अदालत से मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा था कि उनकी बेटी की मौत को केवल आत्महत्या मानकर मामले को बंद नहीं किया जाना चाहिए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया है।
राम कदम ने सवाल उठाते हुए कहा कि दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिवंगत दिशा सालियान के केस में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आखिर किसे बचा रहे थे। यह बड़ा सवाल सामने आ रहा हैं, खासकर तब जब उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे का नाम इस केस में सामने आया हैं।
इससे पहले मुंबई पुलिस ने दिशा सालियान की मौत को लेकर जांच की थी और मामले को आत्महत्या से जोड़कर बंद कर दिया था। अब CBI द्वारा एफआईआर दर्ज कर नए सिरे से जांच किए जाने के बाद इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की दोबारा जांच होगी। अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा ने जहां इसे दिशा के परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है, वहीं इस मामले में आगे की जांच और उसके निष्कर्षों पर सभी की नजरें रहेंगी।
दिशा सालियान की मौत आत्महत्या थी या हत्या इन सारे सवालों के जवाब अब CBI जांच के बाद ही सामनें आयेंगे जिसपर सबकि नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना यह बाकि हैं कि CBI अपनी रिपोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट को कब सौंपती हैं।