

Disha Salian Death Case: दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला एक बार फिर पूरे देश में चर्चाओं में आ गया है। साल 2020 में मुंबई के मलाड इलाके की एक ऊंची इमारत की 14वीं मंजिल से गिरकर हुई दिशा की मौत के सालों बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले की गहन पड़ताल के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को जिम्मेदारी सौंप दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने बड़े सीबीआई अधिकारी की देखरेख में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। इस फैसले ने निष्पक्ष न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों को एक नई दिशा दी है।
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की हत्या की गई थी और इस साक्ष्य को छिपाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया गया था। उनके वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि पुलिस ने लगभग 5 साल बीत जाने के बाद भी पिता को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक नहीं सौंपी थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुंबई पुलिस के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े किए। जजों ने कहा कि बिना एफआईआर दर्ज किए सालों तक केवल दुर्घटना मृत्यु रिपोर्ट यानी एडीआर की आड़ में लंबी जांच खिंचते रहने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।
याचिका में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे का नाम शामिल किए जाने और उन पर एफआईआर दर्ज करने की मांग पर भी कोर्ट ने स्थिति पूरी तरह साफ की। कोर्ट ने कहा कि जब तक जांच अधिकारी के पास किसी व्यक्ति के खिलाफ पुख्ता और पर्याप्त सबूत न हों, तब तक किसी को भी आरोपी नहीं माना जाएगा और न ही हिरासत में लिया जाएगा। आदित्य ठाकरे के वकील ने दलील दी थी कि यह पूरी याचिका राजनीतिक रंजिश के कारण है और दिशा के पिता का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि जजों ने साफ किया कि कोर्ट का मकसद केवल निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया का पालन कराना और परिवार को सही जवाब दिलाना है।
कोर्ट के सामने याचिकाकर्ता के वकील ने कई मेडिकल और तकनीकी बिंदु उठाए। उन्होंने कहा कि 14वीं मंजिल से गिरने के बावजूद शव पर मिले निशानों को लेकर पुलिस की थ्योरी में कई गंभीर खामियां हैं। दूसरी ओर राज्य सरकार और पुलिस का कहना था कि यह सुसाइड या गलती से गिरने का मामला था, और जांच में किसी आपराधिक साजिश के सबूत नहीं मिले थे। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि एफआईआर दर्ज कर पेशेवर तरीके से निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस रंजीत सिंह भोसले की बेंच ने सीबीआई को सभी दस्तावेज और साक्ष्य अपने कब्जे में लेने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने साफ किया है कि यदि जांच के दौरान कोई संज्ञेय अपराध साबित होता है, तो सीबीआई सक्षम कोर्ट के समक्ष चार्जशीट दाखिल करेगी। वहीं अगर जांच में कोई अपराध नहीं पाया जाता है, तो केंद्रीय एजेंसी उचित क्लोजर रिपोर्ट पेश करेगी। इसके साथ ही दिशा सालियान के पिता को क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका दाखिल करने का अधिकार भी दिया गया है।