Nagpur Project Leadership Conclave : नागपुर में आयोजित ‘प्रोजेक्ट विदर्भ 2030-नागपुर प्रोजेक्ट लीडरशिप कॉन्क्लेव’ में विदर्भ के विकास को लेकर मंथन हुआ।
150 से अधिक प्रोजेक्ट प्रोफेशनल्स, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और उद्यमियों ने विकास के लिए बेहतर प्रोजेक्ट लीडरशिप, सुशासन, जोखिम प्रबंधन और समयबद्ध क्रियान्वयन को जरूरी बताया। सम्मेलन में AI, डिजिटल इंजीनियरिंग और स्किल डेवलपमेंट पर भी विशेष चर्चा हुई।
आईटी पार्क स्थित पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में आयोजित सम्मेलन में उद्योग, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने विदर्भ के विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की।
चैप्टर की अध्यक्ष रिनू राजेश ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। परियोजना नेतृत्व का आंदोलन विकसित करना विषय पर उन्होंने कहा कि नागपुर और विदर्भ के रणनीतिक लाभों को वास्तविक विकास में बदलने के लिए अनुशासित परियोजना नेतृत्व और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।
चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा कि निवेश, मजबूत बुनियादी ढांचा और विदर्भ की भौगोलिक स्थिति विकास के बड़े अवसर पैदा करती है। हालांकि इन अवसरों का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब परियोजनाओं को बेहतर नेतृत्व, सुशासन, जोखिम प्रबंधन और विभिन्न हितधारकों के समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
सम्मेलन में उद्योग जगत की ओर से बदलते कारोबारी वातावरण, विनिर्माण क्षेत्र और बुनियादी ढांचे की प्राथमिकताओं पर विचार रखे गए। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बड़े प्रोजेक्ट केवल घोषणा या निवेश तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनकी डिलीवरी और वास्तविक परिणामों पर भी उतना ही ध्यान जरूरी है।
तकनीकी सत्रों में डिजिटल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और AI-सक्षम प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ऑफिस (PMO) के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। शिक्षा और उद्योग जगत ने युवाओं को रोजगार-योग्य बनाने तथा उन्हें केवल डिग्री हासिल करने से आगे ले जाकर प्रभावी परियोजना डिलीवरी के लिए तैयार करने की रणनीति पर विचार किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य में किसी परियोजना की सफलता केवल समय और बजट के आधार पर तय नहीं होगी। व्यावसायिक मूल्य, नवाचार, स्थिरता और दीर्घकालिक परिणाम भी प्रोजेक्ट की सफलता के महत्वपूर्ण मानदंड होंगे।