पूनम चैंबर्स का हिस्सा बचने पर हाई कोर्ट नाराज सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

आधा-अधूरा बुलडोजर एक्शन पड़ा भारी! नागपुर मनपा की कार्यप्रणाली पर भड़का हाईकोर्ट

Poonam Towers Demolition: पूनम टावर्स और पूनम चैंबर्स के अवैध निर्माण मामले में हाई कोर्ट ने मनपा की कार्यप्रणाली पर सख्ती दिखाई। अदालत ने कार्रवाई के लिए समय-सीमा वाला ठोस प्रस्ताव मांगा है।

अंकिता पटेल

Poonam Chambers Illegal Construction Case: नागपुर पूनम टावर्स और पूनम चैंबर्स में हुए अवैध निर्माण को लेकर पूर्व पार्षद विजय बाभरे ने याचिका दायर की जिस पर गत समय हुई सुनवाई के दौरान मनपा ने इन दोनों का अवैध निर्माण हटाने का आश्वासन देते हुए दोनों इकाइयों के मालिक को नोटिस जारी किया था। इसे चुनौती देते हुए कुमार होटल्स के मालिक एन। कुमार की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार मनपा ने पूनम टावर्स का अनधिकृत निर्माण तो तोड़ा किंतु पूनम चैंबर्स का कुछ हिस्सा बचा रहा। इसके लिए अब न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने मनपा की कार्यप्रणाली पर सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने ढांचे को ढहाने के मामले में मनपा से एक ऐसा 'ठोस प्रस्ताव' पेश करने को कहा है जिसमें भविष्य में समय-सीमा बढ़ाने की कोई गुंजाइश न बचे।

6 माह पूर्व ढहाने का दिया था आदेश

उल्लेखनीय है कि अदालत ने इस मामले में पहली बार 10 फरवरी 2026 को संबंधित ढांचे को हटाने या ढहाने का आदेश पारित किया था। इसके बाद भी कई आदेश दिए गए जिनमें से पिछला आदेश 17 जून 2026 को जारी किया गया था। 18 अगस्त को यह मामला 17 जून के आदेश के अनुपालन की स्थिति जानने के लिए अदालत में सूचीबद्ध किया गया था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं था। वहीं नागपुर मनपा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता जेमिनी कासट ने ढांचे को गिराने की प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को दर्शाने वाली एक रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। राज्य सरकार की ओर से एजीपी एनआर पाटिल उपस्थित थे।

मनपा ने मांगा समय

मनपा के वकील जेमिनी कासट ने अदालत से 2 दिन का अतिरिक्त समय मांगा, ताकि वे यह विस्तार से बता सकें कि पूर्व में दिए गए आश्वासन के बावजूद अब तक ढांचे को क्यों नहीं गिराया जा सका। इसके साथ ही उन्हें ढांचे को गिराने के लिए और अधिक समय मांगने को उचित ठहराने के लिए भी यह मोहलत चाहिए थी।

कोर्ट ने मनपा के वकील के अनुरोध को स्वीकार करते हुए समय तो दे दिया लेकिन अधिकारियों के रवैये पर स्पष्ट रुख अपनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हम मनपा के अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि वे इस मामले की गहन जांच करें और ढांचे को हटाने/गिराने के लिए एक ठोस प्रस्ताव पेश करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह प्रस्ताव ऐसा होना चाहिए जिसके बाद आगे और मोहलत मांगने की बिल्कुल आवश्यकता न पड़े।

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