NMC Approves Nagpur Water audit To Atop Leakage : नागपुर शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए महानगरपालिका ने अब वाटर ऑडिट और ग्राहक सर्वेक्षण कराने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य वास्तविक पानी की खपत का सटीक आकलन करना, पाइपलाइनों में होने वाले रिसाव का पता लगाना और पानी की बर्बादी पर नियंत्रण करना है। इसके लिए एक अधिकृत तकनीकी सलाहकार की नियुक्ति की जाएगी। सलाहकार की नियुक्ति पर मनपा 3.22 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
शुक्रवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दिए जाने की जानकारी समिति सभापति शिवानी दाणी ने दी। जल प्रदाय विभाग की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार शासन-मान्य तकनीकी सेवाएं देने वाले सक्षम सलाहकार की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए 3 कराेड़ 22 लाख 18 हजार 525 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति देने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
वाटर ऑडिट के दौरान शहर के जल वितरण नेटवर्क की विस्तृत जांच की जाएगी। नियुक्त एजेंसी द्वारा विभिन्न हिस्सों में फ्लो मीटरिंग की जाएगी और पानी के रिसाव वाले स्थानों की सटीक पहचान की जाएगी। इसके अलावा पाइपलाइनों में लीकेज का पता लगाने, पानी की वास्तविक खपत का आकलन करने तथा अनधिकृत पानी के इस्तेमाल की पहचान पर भी काम किया जाएगा।
मनपा का मानना है कि जल वितरण व्यवस्था में होने वाले नुकसान को कम करना जरूरी है। इसके लिए यह पता लगाना अहम है कि पानी कहां और किस स्तर पर बर्बाद हो रहा है। ऑडिट से वितरण नेटवर्क की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
महाराष्ट्र जल संपदा नियमन प्राधिकरण के मानकों के अनुसार 50 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी का प्रावधान निर्धारित किया गया है। साथ ही वितरण प्रणाली में अधिकतम 13 प्रतिशत तक पानी के नुकसान या रिसाव की सीमा निर्धारित है।
नागपुर शहर में यदि इससे अधिक पानी बर्बाद हो रहा है तो उसका कारण जानना आवश्यक है। वाटर ऑडिट के जरिए पाइपलाइन लीकेज, अनधिकृत कनेक्शन और वितरण व्यवस्था में होने वाले अन्य नुकसान की जानकारी जुटाई जाएगी। ग्राहक सर्वेक्षण से यह भी पता चलेगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की वास्तविक खपत कितनी है।
मनपा के अनुसार ऑडिट पूरा होने के बाद उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जल वितरण व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। इससे पानी की बर्बादी कम करने के साथ भविष्य में शहर की जलापूर्ति योजना को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।