एनसीपी-एसपी की बैठक (सौजन्य-नवभारत) 
नागपुर

NCP-SP जिले में तैयार कर रही थर्ड फ्रंट, कांग्रेस नहीं दे रही भाव, पार्टियों के साथ हुई बैठक

Nagpur News: महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण में 2 दिसंबर को नगर परिषद व नगर पालिका के चुनाव होंगे। सभी राजनीतिक पार्टियों ने इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन लेना भी शुरू कर दिया है।

प्रिया जैस

Nagpur News: स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण में 2 दिसंबर को नगर परिषद व नगर पालिका के चुनाव होने वाले हैं। इसे लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन लेना भी शुरू कर दिया है। 17 नवंबर पर्चा दाखिल करने का अंतिम दिन है लेकिन राज्य में दोनों गठबंधनों महायुति और मविआ में मुख्य पार्टियां भाजपा और कांग्रेस अपने सहयोगी दलों को कोई भाव नहीं दे रही हैं।

यही कारण है कि मविआ में शामिल घटक दल एनसीपी शरद पवार पार्टी और शिवसेना उद्धव ठाकरे ने समविचारी पार्टियों और सामाजिक संगठनों के साथ अलग गठबंधन तैयार कर रही हैं। एनसीपी एसपी ने इस संदर्भ में अनेक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है और समझा जा रहा है कि 2-3 दिनों में ‘थर्ड फ्रंट’ की घोषणा कर दी जाएगी।

बैठक में बनी आम सहमति

एनसीपी के जिलाध्यक्ष प्रवीण कुंटे ने बताया कि कांग्रेस को छोड़कर अन्य समविचारी पार्टियों के साथ संडे को बैठक की गई जिसमें नगर पंचायत, जिला परिषद, पंचायत समिति के चुनाव एक साथ गठबंधन कर लड़ने पर आम सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि चर्चा जारी है और संभवत: 2-3 दिनों में तीसरे मोर्चा की घोषणा कर दी जाएगी। बैठक में चुनाव प्रभारी सलिल देशमुख, किशोर गजभिये, शिवसेना यूबीटी जिला प्रमुख उत्तम कापसे, आम आदमी पार्टी के सोनू फटिंग, राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी के प्रशील कोडापे, रजत नेहरा, सूरज आत्राम, प्रशीक गाडगे, शुभम परतेकी, अखिल भारतीय युवा विकास परिषद के राधेशाम टेकाम, भाकपा के गजानन घोडे, भीम आर्मी के अंकित राऊत, रिपब्लिकन लोकशाही मोर्चा के अरुण गाडे, ओबीसी बहुजन आघाड़ी के रमेश पिसे आदि उपस्थित थे।

कांग्रेस का एकला चलो...

मविआ के सहयोगी दलों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि कांग्रेस निकाय चुनाव में गठबंधन के संदर्भ में कोई चर्चा नहीं कर रही है। एनसीपी को कांग्रेस के संदर्भ में बीते चुनाव में भी बुरा अनुभव रहा है। जिला परिषद में गठबंधन कर चुनाव लड़ा गया था लेकिन एनसीपी की 5 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार भी मैदान में उतर आए थे। जीत के बाद जिला परिषद में एनसीपी को सम्मानजनक स्थान भी नहीं दिया गया।

एक सभापति पद के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसलिए इस बार एनसीपी एसपी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। कांग्रेस द्वारा इस बार भी भाव नहीं दिये जाने के चलते उसने शिवसेना यूबीटी व अन्य दलों के साथ थर्ड फ्रंट बनाकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह भी बता दें कि जिले में निकाय चुनावों में कांग्रेस की दमदार पकड़ रही है। जिप में उसकी पूर्ण बहुमत से सत्ता थी। इसलिए इस बार भी वह एकला चलो की रणनीति पर आगे बढ़ती नजर आ रही है।

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