किसानों का विरोध (सौजन्य-नवभारत) 
नागपुर

न्यू नागपुर योजना पर बवाल! किसानों ने ड्रोन सर्वे से किया इनकार, बोले- मुआवजा तय नहीं तो माप कैसे?

Naya Nagpur Project Protest: ‘नया नागपुर’ परियोजना के विरोध में लाडगांव-गोधनी के किसानों का आक्रोश बढ़ा। मुआवजा तय किए बिना भूमि मापने से किया इनकार, सरकार से स्पष्ट नीति की मांग।

प्रिया जैस

NMRDA Land Acquisition: महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 'नया नागपुर' परियोजना के तहत NMRDA के अंतर्गत लाडगांव गोधनी क्षेत्र के किसानों को भूमि मापने का नोटिस भेजा गया है। लेकिन, किसानों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें अपनी कृषि भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक वे अपनी भूमि का माप लेने की अनुमति नहीं देंगे।

लाडगांव गोधनी के किसान पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी भूमि पर खेती कर रहे हैं और अपनी कृषि से संतुष्ट हैं। हालांकि, एनएमआरडीए के तहत एक नया नागपुर शहर का प्रस्ताव आते ही उनकी संतुष्टि और शांति में खलल पड़ गया है। किसानों का कहना है कि उन्हें 11 जुलाई 2025 को प्राप्त नोटिस में उनकी कृषि भूमि के मुआवजे के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गई है।

किसानों ने उठाए सवाल

किसानों का सवाल है कि जब तक सरकार यह स्पष्ट नहीं करती कि वे प्रति एकड़ कितने पैसे देंगे, तब तक भूमि मापने के लिए उनकी अनुमति क्यों ली जा रही है। 'हम अपनी कृषि भूमि का माप कैसे लेने देंगे, जब तक यह तय नहीं किया जाता कि हमें इस भूमि के बदले कितना मुआवजा मिलेगा' यह सवाल किसानों के दिलों में उठ रहा है।

किसानों का आरोप है कि जिला कलेक्टर कार्यालय ने पहले ही ड्रोन के माध्यम से भूमि का माप ले लिया है, और अब उन्हें यह बताया जा रहा है कि वे अपने खेतों में नया बोरवेल, कुआं या पेड़ नहीं लगा सकते। किसानों का कहना है कि यह सब रिकॉर्ड ड्रोन द्वारा मापने के समय ही लिया गया था, और अब उन्हें अपनी खेती के बारे में कोई भी बदलाव करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सरकार से स्पष्ट मुआवजे की घोषणा की मांग

किसानों ने स्पष्ट रूप से सरकार से यह मांग की है कि उनकी कृषि भूमि का मुआवजा उचित और पारदर्शी तरीके से तय किया जाए। जब तक उन्हें यह पता नहीं चलता कि प्रति एकड़ के हिसाब से उन्हें कितनी राशि मिलेगी, वे अपनी भूमि का माप लेने की अनुमति नहीं देंगे।

किसान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहते हैं, हम अपनी भूमि की रक्षा करेंगे और अगर सरकार हमारी भूमि के बदले उचित मुआवजा नहीं देती, तो हम यह परियोजना अपनी सुविधानुसार कहीं और ले जाने का आग्रह करते हैं। हमें अपने खेतों पर खुशहाल जीवन जीने दिया जाए।

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