नया नागपुर परियोजना (सोर्सः सोशल मीडिया)
नागपुर

किसानों के लिए संजीवनी नया नागपुर, 6.25 एकड़ जमीन के बदले किसानों को मिले 17.87 करोड़ रुपए और 6 प्लॉट

Naya Nagpur Project: नया नागपुर परियोजना के तहत दीपक और सुनील गौत्रे को 6.25 एकड़ जमीन के बदले 17.87 करोड़ रुपए और 6 विकसित प्लॉट मिले। दोनों ने खेती की जमीन, आवासीय प्लॉट और एफडी में निवेश किया।

आंचल लोखंडे

Nagpur Land Acquisition Compensation: नया नागपुर परियोजना में जमीन अधिग्रहण को लेकर भले ही अब भी नाराजगी दिखाई दे रही है लेकिन यह भी हकीकत है कि इस भव्य प्रोजेक्ट ने कई किसानों को संजीवनी देने का काम किया है। ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों में जमीन मुआवजा मिलने के बाद किसानों की जिंदगी किस तरह बदली, इसका एक उदाहरण दीपक डोमाजी गौत्रे और उनके बड़े भाई सुनील डोमाजी गौत्रे की कहानी से मिलता है। उल्लेखनीय है कि नया नागपुर परियोजना में जाने वाली जमीन के अधिग्रहण के लिए नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) सीधी खरीद प्रक्रिया के तहत किसानों को 5 गुना मुआवजा दे रहा है।

साथ ही प्रति एकड़ पर 1,500 वर्ग फुट का विकसित प्लॉट भी दिया जा रहा है। सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री पर स्टाम्प ड्यूटी भी माफ की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ड्रीम प्रोजेट 'नया नागपुर' को लेकर एनएमआरडीए पूरी सक्रियता से जुटा हुआ है। इन दोनों किसान बंधुओं की नया नागपुर अंतर्गत क्षेत्र में लगभग 6.25 एकड़ जमीन थी जो कि उनके पिता ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेचकर उनके नाम पर खरीद दी थी। नया नागपुर परियोजना में इनकी जमीन सहमति से अधिग्रहित की गई। इसके बदले उन्हें नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) से 17 करोड़ 87 लाख रुपए और 6 विकसित प्लॉट मुआवजे के रूप में मिले।

6 महीने में 50% से अधिक जमीन अधिग्रहण पूरा

मुआवजा मिलने से पहले दीपक और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी तंग थी। दीपक अपना मेडिकल शॉप और इंटरनेट सेंटर चालाते थे लेकिन इंटरनेट सेंटर बंद हो जाने के कारण उनकी पूरी आमदनी खत्म हो गई थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि उन्हें अपना मेडिकल शॉप और वाहन तक कर्ज चुकाने के लिए बेचनी पड़ी थी।

खेती के सहारे चलने वाले परिवार को इस साल बारिश न होने के कारण सूखे का सामना करना पड़ रहा था। अगर इस साल पैसा नहीं मिलता तो उनकी स्थिति बेहद खराब हो जाती। ऐसे मुश्किल समय में यह मुआवजा परिवार के लिए एक संजीवनी बन गया। लेकिन खास बात यह थी के मुआवजे के रूप में बड़ी राशि मिलने के बाद दोनों भाइयों ने इसका बहुत ही समझदारी से उपयोग किया।

किसानों को 5 गुना मुआवजा और विकसित प्लॉट

दोनों भाइयों ने मिलकर नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में 20 एकड़ खेती की जमीन खरीद ली। सुनील और दीपक ने हिंगना में आवासीय प्लॉट और रो हाउस भी ले लिए। उन्होंने परिवार की सुरक्षा के लिए माता-पिता के नाम पर 50-50 लाख रुपए की एफडी करवा दी जिससे उन्हें अब हर महीने 50-60 हजार रुपए मिलते हैं, ताकि उन्हें कभी किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

इसके अलावा दोनों भाइयों ने 1-1 करोड़ रुपए की एफडी कर ली जिससे अब उनके लिए भी हर महीने आवक का एक मजबूत स्त्रोत बन गया। इस तरह, आर्थिक तंगी और कर्ज में डूबे इस परिवार की चौतरफा ग्रोथ हुई और उनका 1 भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो गया। इसी तरह विजय चिंचोलकर, अर्चना इटनकर, संकारी जाधव जैसे किसानों के जीवन को भी ने जमीन के बदले मिले मुआवजे ने संजीवनी ने देने का काम किया है।

एनएमआरडीए को मिली 95% सहमति

नया नागपुर परियोजना के काम में तेजी का एक प्रमाण यह है कि इसके जमीन अधिग्रहण के लिए एनएमआरडीए को अब तक 95 प्रतिशत किसानों, जमीन मालिकों से सहमति प्राप्त हो चुकी है। मतलब यह किसान अपनी जमीन देने के लिए राजी हैं। एनएमआरडीए के अधिकारीयों का दवा है कि प्रोजेक्ट को लेकर किसानों में संतोष है। एनएमआरडी ने मई महीने में अधिग्रहण शुरू किया था। महज 6 महीने में एनएमआरडीए ने 95 प्रतिशत सहमति प्राप्त कर ली और 50 प्रतिशत से अधिक अधिग्रहण भी पूरा कर लिया है।

जामिया में 20 साल बाद होंगे छात्र संघ चुनाव, संविधान मंजूर होने के 15 दिन में मतदान, हड़ताल फिर भी जारी

Weather Today: बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान, 3 राज्यों में स्कूल-कॉलेज बंद; 7 राज्यों में अलर्ट जारी

महाराजा हरि सिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे, फिर क्यों किया भारत के साथ विलय? जानिए कश्मीर की पूरी कहानी

राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस में 8 साल बाद फैसला आज, अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा है मामला

मोदी का बाप भी जाएगा... खरगे के बयान पर केस दर्ज, BJP का देशव्यापी प्रदर्शन आज, पुतला भी जलाएगी पार्टी