Nitin Gadkari Nana Patekar: सिनेमा के बड़े परदे पर अपने अभिनय से अनगिनत किरदारों को अमर करने वाले नाना पाटेकर नागपुर से केवल एक कलाकार के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिबद्धता के रिश्ते से भी जुड़े हुए थे।
पानी, किसान और ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं से जुड़े उनके कार्यों की झलक नागपुर में आयोजित 'जल क्रांति परिषद' में एक बार फिर देखने को मिली थी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में 18 मई 2026 को सुरेश भट सभागृह में आयोजित परिषद में 'नाम फाउंडेशन' के अध्यक्ष के रूप में नाना पाटेकर ने जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया था।
नाना पाटेकर ने नितिन गडकरी से उनके आवास पर जाकर भेंट की। इस दौरान कंचन गडकरी ने अपने खेत में उगाया गया एक किलो वजन का प्याज नाना को उपहार स्वरूप दिया। नाना के गडकरी परिवार के साथ विशेष आत्मीय संबंध थे। हालांकि इस वर्ष की यह यात्रा नागपुर के लिए नाना की अंतिम भेंट साबित हुई।
नाना पाटेकर की यादों को ताजा करते हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवाली देशपांडे ने कहा कि 'प्रहार' फिल्म की शूटिंग से शुरू हुआ नाना मामा के साथ हमारा रिश्ता आगे चलकर परिवार के आत्मीय संबंधों में बदल गया। जब भी वे शूटिंग के सिलसिले में नागपुर जिला या बेलगाम आते तो घर में उनका व्यवहार कभी मेहमान की तरह नहीं रहता था।
वे बिल्कुल अपने हक के घर की तरह सहजता से रहते थे, वे बेबाक और स्पष्टवादी थे। उनकी बातों में एक दृढ़ता होती थी लेकिन उसके पीछे लोगों के प्रति आत्मीयता और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की तड़प छिपी रहती थी, इसीलिए वे मेरे लिए सिर्फ एक महान कलाकार ही नहीं बल्कि समृद्ध विचारों वाले व्यक्तित्व थे।
एक अविस्मरणीय प्रसंग को याद करते हुए उन्होंने बताया कि एनसीसी का सीएटीसी-3 कैंप था और मैं बेस्ट कैडेट प्रतियोगिता में नागपुर ग्रुप का प्रतिनिधित्व कर रही थी। वह आरडीसी 1993 महाराष्ट्र कंटिजेंट का कैप था।
नाना मामा इत्तेफाक से उस वक्त पुणे में थे और कैंप में मुझसे मिलने आए, उन्होंने मुझे कसकर गले लगाया और कहा, 'मुझे पता है कि तुम्हारी प्रतिस्पर्धी बहुत मजबूत है लेकिन मुझे यह भी पता है कि गोल्ड मेडल तुम ही जीतोगी। उनका यह विश्वास शब्दों से परे था। उस एक पल ने मेरे भीतर एक अलग ही उत्साह और आत्मविश्वास भर दिया।
- फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवाली देशपांडे (से.नि.)
समाज सेवा के लिए समर्पित नाना पाटेकर 2016 में विदर्भ में अपनी संस्था शुरू करना चाहते थे। तब शुरुआत कहां से की जाए, यह तय करने के लिए उन्होंने नागपुर और विदर्भ में पहले से सक्रिय 'जन मंच' संस्था की मदद ली थी।
जन मंच के सहयोग से उन्होंने नागपुर और आसपास के जिलों के किसान आत्महत्या पीडित परिवारों की विधवाओं को 15,000 रुपये के चेक और कपड़ों के साथ वित्तीय सहायता प्रदान की थी।
उनके व्यक्त्तित्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उस मंच से उन्होंने कहा था ऐसे किसान परिवारों को मिलने वाला सहारा कभी रुकना नहीं चाहिए, हमारे एक प्रयास से इन किसान परिवारों की स्थिति बदल सकती है। उनका आकस्मिक निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
- राजीव जगताप (पूर्व अध्यक्ष, जन मंच)
नाना पाटेकर के साथ जुड़ी यादें आज अचानक उमड़ पड़ी हैं। उनके जैसा रफ एंड टफ लेकिन उतना ही दयालु और संवेदनशील अभिनेता अब होना मुश्किल है। जब 'प्रहार समाज जागृति संस्था का उद्घाटन हुआ था तय नाना पाटेकर आए थे और मैंने उनका साक्षात्कार लिया था।
वह मुलाकात मेरे हृदय की एक अनमोल धरोहर बन गई। इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यक्रम में रेशिमबाग मैदान में। जब नाना का भाषण हुआ तब उनसे मुलाकात हुई।
वर्ष 1997 में नाशिक में 77वां अखिल भारतीय मराठी नाट्य सम्मेलन आयोजित हुआ था जिसमे नाना पाटेकर का अध्यक्षीय भाषण बेहद शानदार था। बड़ा पर्दा हो या छोटा पर्दा, नाना की एंट्री यानी शेर की एंट्री होती थी। अब ऐसी एंट्री दोबारा देखने को नहीं मिलेगी।
प्रकाश अदलाबादकर