नागपुर न्यूज  
नागपुर

नागपुर के ट्रैफिक का सत्यानाश, बड़े-बड़े दावे, चेकिंग के नाम पर ‘वसूली’, विभाग में GPSI की भरमार

Nagpur: एक तरफ अधिकारियों द्वारा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ यातायात व्यवस्था का सत्यानाश हो गया है। शहर की यातायात व्यवस्था लड़खड़ाती जा रही है।

प्रिया जैस

Nagpur News: नागपुर में ट्रैफिक पुलिस रास्तों पर तो दिख रही है लेकिन व्यवस्था सुचारु रखने के लिए नहीं। जगह-जगह पुलिसकर्मियों का झुंड चेकिंग में लगा हुआ है। ऐसा नहीं है कि हर जगह ‘वसूली’ का खेल चल रहा है लेकिन कई स्थान ऐसे हैं जहां जांच के नाम पर ‘वसूली’ अभियान चल रहा है। एक बार किसी वाहन चालक को रोक लिया गया तो उसकी जेब हल्की होना पक्का है।

हाल ही में पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 5 जगहों पर ट्रैफिक पुलिस चौकियों का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि नागपुर की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रही है। ऐसे में आशा जताई कि शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है।

बसों पर भी नहीं लगा पाए लगाम

करीब डेढ़ महीने पहले डीसीपी ट्रैफिक लोहित मतानी ने शहर में बसों के स्टॉपेज पर प्रतिबंध लगाया। जगह-जगह रुककर सवारी ले रही बसों पर लगाम कसने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए लेकिन मतानी की अधिसूचना केवल कागजों पर ही दिखती है। जमीनी स्तर पर इसका पालन न तो बस चालक कर रहे हैं और न संबंधित ट्रैफिक जोन के अधिकारी और कर्मचारी इसे मानते हैं। सड़कों पर बसों का जमावड़ा पहले की तरह ही हो रहा है। टोइन और मोबाइल वैन कार चालक और दोपहिया वाहन चालकों पर तो कार्रवाई करती हैं लेकिन सड़क पर खड़ी बसों को आंख बंद करके नजरअंदाज कर वाहन निकल जाते हैं। केवल कागजी घोड़े दौड़ाने से समस्या हल नहीं होने वाली। पुलिस को रास्ते पर उतरकर सख्ती करनी होगी जो वर्तमान माहौल में तो लगभग नामुमकिन सा लगता है।

इंश्योरेन्स की जांच और 500 अंदर

शहर की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों का 3 से 4 लोगों का ग्रुप आसानी से दिख जाएगा। अब यातायात संभालने के लिए पुलिस को रास्ते पर उतरना ही पड़ेगा लेकिन ऐसे ग्रुप चौराहे पर खड़े रहकर यातायात व्यवस्था सुचारु रखने में कम और एक किनारे पर खड़े रहकर ‘बकरों’ की तलाश ज्यादा करते हैं। वाहन चालक पूरी कुशलता से वाहन चला रहा हो और हेलमेट भी पहना हो तो भी उसे किस तरह परेशान किया जा सकता है इसका उदाहरण दीक्षाभूमि चौक पर रोज देखने मिलता है। पुलिसकर्मी पूरी कुशलता के साथ ऐसा वाहन देखते हैं जो 5 वर्ष या उससे ज्यादा पुराना हो। वाहन चालक को इंश्योरेन्स के बारे में पूछा जाता है। इसके बाद वाहन लगता है सड़क के कोने में। फिर शुरू होती है वाहन चालक की परीक्षा। इंश्योरेन्स और पीयूसी के मोटे चालान का डर बताया जाता है। बाद में ले-देकर मामला निपटाने की बात शुरू होती है और कम से कम 500 रुपए तो अंदर हो ही जाते हैं।

चौराहों पर लगे कैमरे किस काम के

शहर के हर एक प्रमुख चौराहों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। इन कैमरों के जरिए पुलिस नियम की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ ई-चालान भी जारी करती है। वैसे इन कैमरों की प्राथमिक उपयोगिता भी यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए ही होनी चाहिए। इन कैमरों से चौराहों पर तैनात पुलिस कर्मियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जानी चाहिए।

अधिकारियों के चेंबर में लाइव प्रचारण होता है। ऐसे में अधिकारी कम से कम अपने विभाग के लोगों पर तो निगरानी रख सकते हैं। कौन यातायात व्यवस्था संभाल रहा है, कौन चौराहे के किनारे खड़े होकर केवल वाहनों की जांच के बहाने जेब गरम कर रहा है, पता चल जाएगा।

पूरे विभाग में GPSI की भरमार

पूरे यातायात विभाग में ग्रेप पुलिस सब-इंस्पेक्टर की भरमार है। विभागीय स्तर पर पदोन्नत हुए जीपीएसआई को सर्वसामान्य तबादलों में ज्यादातर ट्रैफिक विभाग में ही पोस्टिंग मिली है। इसकी मुख्य वजह यह है कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे इन पीएसआई को थानों की केस डायरी नहीं संभालनी है।

अपनी आखिरी पोस्टिंग में हर कोई चौके-छक्के लगाना चाहता है और रणनीति में कामयाब भी हो गया है, जबकि फील्ड पर युवा लोगों की नियुक्ति होनी चाहिए जो वाकई में यातायात सुधारने के लिए मेहनत कर पाएं। कुछ चुनिंदा जीपीएसआई ही रास्ते पर यातायात व्यवस्था संभालते दिखते हैं। अन्य एंट्री व्यवस्था बनाए रखने में चुस्त हैं। अब शहर की यातायात व्यवस्था संभालने के लिए होमगार्ड की मदद ली जा रही है। होमगार्ड सड़कों पर बैटन लेकर व्यवस्था संभालते हैं, जबकि ट्रैफिक विभाग के कर्मचारी एक किनारे पर केवल जांच अभियान चलाते हैं।

देश के कई राज्यों में आगजनी का तांडव: दिल्ली-गाजियाबाद से सिक्किम और पटना तक मचा हड़कंप

देश का पहला निजी फ्यूजन रिएक्टर, ऊर्जा क्षेत्र में नई क्रांति की तैयारी; जानिए क्यों है यह खास

अनंत सिंह की बेटी की भव्य शादी, जानिए कौन हैं शिवांगी और उनके पति ऋषिकेश; क्या करते हैं काम?

बाबरी मस्जिद को टूटते देख सोनिया गांधी क्यों रोने लगी? मात्र 1 प्वॉइंट में जानें

अब चीन पर निर्भरता खत्म! भारत में बनेंगे शिपिंग कंटेनर, मोदी सरकार ने खोला 10 हजार करोड़ का खजाना