नागपुर के कविकुलगुरु कालिदास सभागार में पांचवां सप्तर्षि पुरस्कार समारोह आयोजित हुआ।
हिंदू रिसर्च फाउंडेशन ने सात प्रमुख हस्तियों को सम्मानित किया।
प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गीता कृष्णन जी. पिल्लई ने की।
Hindu Research Foundation Nagpur: नागपुर में भारतीय ज्ञान-परंपरा की गौरवशाली विरासत को रेखांकित करते हुए साहित्य, कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 7 प्रमुख हस्तियों को हिंदू रिसर्च फाउंडेशन की ओर से प्रतिष्ठित 'सप्तर्षि पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कविकुलगुरु कालिदास सभागार में आयोजित 5वें 'सप्तर्षि पुरस्कार वितरण समारोह में यह सम्मान प्रदान किया गया। 'रिविजिटिंग द ग्लोरियस पास्ट ऑफ भारतवर्ष विषय पर आधारित इस समारोह में प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया।
जामनगर स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन रिसर्च सेंटर के डेटा एंड इनोवेशन विभाग की यूनिट प्रमुख डॉ. गीता कृष्णन जी. पिल्लई ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
मंच पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी, सूरत के जीवदया फाउंडेशन के किशोरभाई शाह, आईआईएम के निदेशक डॉ. भीमराया मैत्री, हिंदू रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक डॉ.टीएस भाल, चेयरमैन सुरेश कोते, भगवान राऊत और प्रीति रामकृष्णन उपस्थित थे।
महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार पद्मश्री भालचंद्र वि. नेमाडे, आर्यभट्ट पुरस्कार पदाची प्रो. वी. कामकोटी वीझिनावन, नागार्जुन पुरस्कार पद्माची प्रो. बलथिल प्रदीप, विश्वकर्मा पुरस्कार डॉ. अनित रामजी सुतार, आचार्य भारद्वाज पुरस्कार सुयया सिंह, आवर्य सुश्रुत पुरस्कार वेदप्रकाश मिश्रा, आचार्य कण्णाद पुरस्कार प्री संजय जे, ढोबले को प्रदान किया गया।
इस प्रकार के आयोजन न केवल हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को पुनर्जीवित करने का कार्य करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेने के लिए भी प्रोत्साहित करते हैं। नागपुर जिले में संपन्न हुआ यह पाँचवाँ 'सप्तर्षि पुरस्कार' समारोह अपनी इन सभी विशिष्ट उपलब्धियों के साथ अकादमिक और सांस्कृतिक जगत में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।