Nagpur Railway Employees Union: मध्य रेलवे नागपुर मंडल में कर्मचारियों के स्थानांतरण, ड्यूटियों के आवंटन और संवेदनशील पदों पर लंबे समय से पदस्थापना को लेकर प्रशासन और कर्मचारी संगठन आमने-सामने आ गए हैं। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (एमआरकेएस) ने पारदर्शी ट्रांसफर नीति की वकालत करते हुए मंडल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
संघ ने नियमों को ताक पर रखकर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे रेलकर्मियों और इस व्यवस्था को आश्रय देने वाले अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सभी पुख्ता कागजी सबूतों के साथ उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
एमआरकेएस के महामंत्री सागर सिंह तोमर ने मध्य रेलवे के महाप्रबंधक (मुंबई) को ज्ञापन भेजकर आरोप लगाया है कि परिचालन विभाग में नियमों का उल्लंघन हो रहा है। सामान्य नियमानुसार संवेदनशील पदों पर 3 वर्ष (अधिकतम 1 वर्ष विस्तार) का कार्यकाल तय है, लेकिन कई स्टेशन मास्टरों, ट्रेन मैनेजरों और कंट्रोलरों को 10 से 25 वर्षों से एक ही के साथ उच्चस्तरीय जांच की मांग की। नियमों की अनदेखी और पक्षपात एमआरकेएस के महामंत्री सागर सिंह तोमर ने मध्य रेलवे के महाप्रबंधक (मुंबई) को ज्ञापन भेजकर आरोप लगाया है कि परिचालन विभाग में नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
सामान्य नियमानुसार संवेदनशील पदों पर 3 वर्ष (अधिकतम 1 वर्ष विस्तार) का कार्यकाल तय है, लेकिन कई स्टेशन मास्टरों, ट्रेन मैनेजरों और कंट्रोलरों को 10 से 25 वर्षों से एक ही स्थान पर बनाए रखा गया है। एमआरकेएस का दावा है कि फील्ड में ड्यूटी न करने के बावजूद कुछ कर्मियों को ड्रेस और टॉर्च भत्ते का लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल आधार पर हल्के काम ('लाइट जॉब की पात्रता रखने वाले बीमार कर्मचारियों से कठिन और नाइट ड्यूटी कराई जा रही है। एमआरकेएस ने वरिष्ठ मंडल परिचालन विभाग प्रमुख व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर तानाशाही, वित्तीय अनियमितता और एमआरकेएस पदाधिकारियों से द्वेषपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए तत्काल तबादले की मांग की।
वहीं तोमर ने कहा कि रेलवे बोर्ड के सर्कुलर के अनुसार, यह बात सही है कि पदाधिकारियों के ट्रांसफर लिए यूनियन की अनुमति जरूरी है लेकिन यह नियम केवल एक वर्ष की सीमा तक लागू है। यदि पदाधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज है या फिर कोई कानूनी कार्यवाही जारी है तो प्रबंधन तत्काल प्रभाव से ऐसे रेलकर्मी का ट्रांसफर कर सकता है।
मंडल के तहत पिछले कई वर्षों से एक ही स्टेशन और एक ही विभाग में जमे यूनियन पदाधिकारियों में ऐसे भी लोग है जिन्होंने 5 जनवरी 2024 को कंट्रोल रूम हाईजैक करके रेल परिचालन ठप करने जैसा संगीन अपराध किया था। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई है लेकिन आज ढाई वर्षों के बाद भी हाईजैकर पदाधिकारी अब भी कंट्रोल रूम में ही ड्यूटी कर रहे हैं। क्या परिचालन विभाग प्रमुख इस बात की गारंटी देंगे कि ये पदाधिकारी दोबारा कंट्रोल रूम बंद नहीं करेंगे? आखिर मंडल प्रबंधन और परिचालन विभाग ऐसे यूनियन पदाधिकारियों पर इतना मेहरबान क्यों है?
इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वरिष्ठ मंडल परिचालन विभाग के सीनियर डीओएम कृष्णाथ पाटिल की ओर से स्पष्ट किया गया कि संवेदनशील पदों पर कार्यरत कई कर्मचारी मान्यता प्राप्त यूनियनों के पदाधिकारी हैं। नियमानुसार उनके स्थानांतरण के लिए संबंधित यूनियनों की अनापत्ति (सहमति) आवश्यक होती है, जिससे प्रक्रिया में समय लगता है। प्रशासन की ओर से ऐसे कर्मचारियों के तबादले का प्रस्ताव पहले ही वरिष्ठ स्तर पर भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि एमआरकेएस की सभी गलतफहमियों को दूर कर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।
वहीं तोमर ने कहा कि रेलवे बोर्ड के सर्कुलर के अनुसार, यह बात सही है कि पदाधिकारियों के ट्रांसफर के लिए यूनियन की अनुमति जरूरी है लेकिन यह नियम केवल एक वर्ष की सीमा तक लागू है। यदि पदाधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज है या फिर कोई कानूनी कार्यवाही जारी है तो प्रबंधन तत्काल प्रभाव से ऐसे रेलकर्मी का ट्रांसफर कर सकता है।
मंडल के तहत पिछले कई वर्षों से एक ही स्टेशन और एक ही विभाग में जमे यूनियन पदाधिकारियों में ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने 5 जनवरी 2024 को कंट्रोल रूम हाईजैक करके रेल परिचालन ठप करने जैसा संगीन अपराध किया था। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई है लेकिन आज ढाई वर्षों के बाद भी हाईजैकर पदाधिकारी अब भी कंट्रोल रूम में ही ड्यूटी कर रहे हैं। क्या परिचालन विभाग प्रमुख इस बात की गारंटी देंगे कि ये पदाधिकारी दोबारा कंट्रोल रूम बंद नहीं करेंगे? आखिर मंडल प्रबंधन और परिचालन विभाग ऐसे यूनियन पदाधिकारियों पर इतना मेहरबान क्यों हैं?