नागपुर में ऑटोरिक्शा में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने पर सवाल।
सामान्य यात्री ऑटो में चालक के अलावा तीन यात्रियों की अनुमति का उल्लेख।
कुछ ऑटो में 12 से 14 सवारियां बैठाने का आरोप।
सीताबर्डी, इतवारी बाजार, गणेशपेठ और मेडिकल चौक जैसे इलाकों में समस्या की शिकायत।
ट्रैफिक पुलिस से विशेष अभियान और कार्रवाई के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग।
Nagpur Traffic Police Overloaded Auto Rickshaw Traffic Management: नागपुर की सड़कों पर ऑटोरिक्शा में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने की समस्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सामान्य यात्री ऑटो में चालक के अलावा तीन यात्रियों की अनुमति होने के बावजूद चार-पांच और कुछ मामलों में 12-14 सवारियां बैठाने का आरोप है। सीताबर्डी, रेलवे स्टेशन, इतवारी बाजार और गणेशपेठ जैसे व्यस्त इलाकों में ओवरसीटिंग पर प्रभावी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
नागपुर शहर की सड़कों पर यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हेलमेट नहीं पहनने, सीट बेल्ट नहीं लगाने या सिग्नल तोड़ने पर वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई होती है, लेकिन ऑटोरिक्शा में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के मामलों में सख्ती कितनी है? यह सवाल अब चर्चा में है।
शहर के कई इलाकों में ऑटोरिक्शा के भीतर और बाहर यात्रियों को बैठाकर ले जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इससे न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
सामान्य यात्री ऑटोरिक्शा में चालक के अतिरिक्त तीन यात्रियों को बैठाने की अनुमति होने का उल्लेख किया जाता है। इसके बावजूद शहर में कई ऑटो में चार-पांच यात्रियों को बैठाना आम होने की शिकायत है। कुछ मामलों में एक ऑटो में 12 से 14 लोगों तक को बैठाने का आरोप भी लगाया गया है।
क्षमता से अधिक सवारियां होने पर अचानक ब्रेक लगाने, मोड़ पर संतुलन बिगड़ने या दूसरे वाहन से टक्कर होने की स्थिति में दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। अतिरिक्त कमाई के लिए यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करना गंभीर चिंता का विषय है।
सीताबर्डी मेन रोड, नागपुर रेलवे स्टेशन परिसर, इतवारी बाजार, गांधीबाग, कॉटन मार्केट चौक, गणेशपेठ बस स्टैंड, सक्करदरा चौक, छत्रपति चौक, सदर, जरीपटका, ऑटोमोटिव चौक, मानेवाड़ा और मेडिकल चौक जैसे इलाकों में ऑटोरिक्शा की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
इन स्थानों पर सवारियां चढ़ाने-उतारने के दौरान सड़क पर अचानक ऑटो रोकने और यातायात बाधित होने की शिकायतें भी उठती हैं। ऐसे में इन यात्री बहुल क्षेत्रों में निगरानी और नियमों के पालन की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।
ओवरसीटिंग की समस्या को लेकर ट्रैफिक पुलिस से प्रमुख चौराहों और ऑटोरिक्शा स्टैंड पर विशेष अभियान चलाने की मांग की जा रही है। बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और कार्रवाई के आंकड़े सार्वजनिक करने की जरूरत भी जताई गई है।
यातायात नियमों का पालन सभी वाहन चालकों के लिए जरूरी है। ऐसे में सवाल है कि शहर में ओवरलोड ऑटोरिक्शा पर प्रभावी निगरानी कब बढ़ेगी। दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही नियमों का पालन सुनिश्चित करना यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।