नागपुर दक्षिण-पश्चिम (डिजाइन फोटो) 
नागपुर

सीएम सीट पर कांग्रेस को करनी होगी कड़ी मेहनत, हाई प्रोफाइल दक्षिण-पश्चिम में प्रभारियों की रणनीति

Nagpur South West MNC Election 2026: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृहक्षेत्र दक्षिण-पश्चिम नागपुर में मनपा चुनाव का पारा सातवें आसमान पर है। जहां बीजेपी 24 में से 24 सीटें जीतने का दावा कर रही हैं।

प्रिया जैस

Devendra Fadnavis Constituency: नागपुर महानगरपालिका चुनाव के दौरान सिटी ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लोगों की नजर दक्षिण-पश्चिम सीट पर होगी। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के क्षेत्र में मनपा चुनाव के दौरान किसे कितनी सीटें मिलती हैं यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे तो इस क्षेत्र में इस बार 24 सीटों का गणित है। इनमें से अधिकांश सीटें बीजेपी के पास थीं, जबकि कांग्रेस के पास 5 थीं।

फडणवीस ने पिछले 8-10 वर्षों में अपने क्षेत्र में अनेक योजनाएं शुरू कीं, जनता की समस्याओं का समाधान निकाला है। अपने क्षेत्र में वे लोकप्रिय भी हैं जिस कारण विधानसभा चुनाव में उन्हें अधिक वोट भी मिले थे। जनता के विश्वास पर वे सवार हैं। वहीं कांग्रेस ने भी विधानसभा चुनाव में वोट बढ़ाने में सफलता पाई थी।

इसे कांग्रेस सकारात्मकता से ले रही है। टिकट बंटवारे के दौरान बीजेपी में पड़ी फूट को भुनाने के फिराक में कांग्रेस है। कांग्रेस का सीधे तौर पर कहना है कि सीएम का क्षेत्र होने के बाद भी समस्याएं कम नहीं हुई हैं बल्कि जनता की समस्याओं में इजाफा हुआ है।

फडणवीस ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रफुल्ल गुडधे को 39,000 वोटों से हराया था। यह इस सीट से उनकी लगातार चौथी जीत थी। लोकसभा चुनावों की तुलना में भाजपा के मतदाताओं की संख्या में 14,225 की बढ़ोतरी हुई, जबकि कांग्रेस का भी लगभग 8,000 वोटों का ही इज़ाफ़ा हुआ। देवेन्द्र को 1।29 लाख वोट मिले थे जो 56।88 फीसदी थे, कांग्रेस के ‌प्रफुल्ल को 89,691 वोट मिले थे जो 39।43 फीसदी होता है।

दक्षिण-पश्चिम पर एक नजर

दक्षिण-पश्चिम में कुल सीटों की संख्या 24 है। इसमें कई क्षेत्रों का समावेश है। प्रभाग 34, 33, 13 में एक-एक सीट है, जबकि 17 में 2, 16,35,36 और 37 प्रभाग में 4-4 सींटे हैं, जबकि 38 में 3 सीटें हैं। दायरा बड़ा भी है और कई क्षेत्रों में जुड़ा है। कुणबी, तेली, ब्राह्मण, माली, हिंदीभाषियों का बोलबाला है। इस विधानसभा में लगभग 4.11 लाख वोटर्स हैं।

विधानसभा में मिले वोट

उम्मीदवार वोट प्रतिशत
देवेन्द्र फडणवीस 129,401 56.88
प्रफुल्ल गुडधे 89,691 39.43

24 में 24 सीटें लाने का टारगेट

मुख्यमंत्री राज्य के विकास के साथ-साथ अपने क्षेत्र के विकास को गंभीरता से लेते हैं। पिछले कुछ सालों में ही लगभग 500 करोड़ रुपये का विकास किया गया है और इससे बुनियादी सुविधाओं में इजाफा किया गया है। गार्डन, सड़क, मेडिकल, शिक्षा के क्षेत्र में काफी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जनता जो भी चाहती है वह सीधे फडणवीस को बताती है और वे उन समस्याओं को दूर करते हैं। जनता के साथ सीधा संवाद और संपर्क ही उनकी ताकत है। अपने विधानसभा क्षेत्र में ‘सबका साथ, सबका विकास’ थीम के साथ ही वे आगे बढ़ रहे हैं। जनता को भी यह आभास है कि उनके क्षेत्र का लड़का पूरे राज्य का विकास कर रहा है, इसलिए रिश्ते काफी मजबूत हैं। पिछली बार कुछ सीटें बीजेपी के पास नहीं थीं लेकिन इस बार हमें पूरा यकिन है कि बीजेपी 24 में से 24 सीटें अपने नाम करेगी।

सीट बंटवारे का पूरा ख्याल

इसके लिए उसी अनुरूप नीति भी बनाई गई है। हर समाज को अपने साथ लिया गया है। टिकट बंटवारे के दौरान भी समीकरणों का पूरा-पूरा ख्याल रखा गया है। सुदर्शन, मराठा, यादव, चर्मकार, तेली, कुणबी, ब्राह्मण, कलार, पवार समाज के कार्यकर्ताओं को टिकट दिया गया है। निरंतर विकास और सतत प्रयास बीजेपी का मूलमंत्र है। इस मूलमंत्र को फडणवीस आगे बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

महज 10 वर्षों में उन्होंने न सिर्फ अपने क्षेत्र को बल्कि पूरे नागपुर को बदलने का काम किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का भरपूर साथ उन्हें मिल रहा है। डबल-इंजन सरकार को ट्रिपल इंजन में बदलने से विकास की गति और तेज होगी। जनता को दोनों नेताओं के काम पर पूरा भरोसा है और आगामी चुनाव में भी इसका स्पष्ट असर देखने को मिलेगा।

- संदीप जोशी, विधायक

कहीं से नहीं लगता सीएम का क्षेत्र

कागजी घोड़े काफी दौड़ाये गए। अब भी लुभावनी बातें की जा रही हैं। बीजेपी का यह फंडा अब बहुत दिनों तक चलने वाला नहीं है। दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में भी यही हाल है। बातें काफी कहीं गई थीं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। राज्य के मुख्यमंत्री का क्षेत्र यह कहीं से भी दिखाई नहीं देता है। केवल सीमेंट रोड ही विकास का पैमाना नहीं हो सकता है। मुख्यमंत्री के क्षेत्र में युवाओं को रोजगार नहीं है। पढ़े-लिखे युवा आज दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए जा रहे हैं और उनके माता-पिता यहां अकेले रहते हैं। ऐेसे लोगों की तदाद तेजी से बढ़ रही है, फिर भी विकास की गाथा गाने से बीजेपी वाले थक नहीं रहे हैं। सीएम क्षेत्र की ही बात करें तो इस क्षेत्र में हेल्थ, शिक्षा, मनोरंजन, बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है लेकिन इस ओर उनका कोई ध्यान नहीं है। रोजाना जनता परेशान हो रही है।

15 सीटों का टागरेगट सेट

बातें सामने रखने पर उस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। महानगरपालिका को जो भी काम करना था, अब तक कागजों पर है। उल्टे 24x7 पानी का वादा तक नहीं निभाया जा सका है। पानी, बिजली, घर की दरें बढ़ा दी गई हैं। आम जनता बढ़े हुए शुल्क से टूट चुकी है लेकिन विकास के नाम पर मध्यवर्गीय लोगों की कमर तोड़ी जा रही है। कुप्रशासन और भ्रष्टाचार का बोलबाला है।

सरकारी जमीन बिल्डरों को देना और विकास की बात करना इनकी फितरत हो गई है। इससे आम जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि पार्टी ‘मजबूत’ हो रही है। जनता इन भ्रष्टाचारों को समझ रही है। आने वाले चुनाव में वह इन्हीं बातों को देखते हुए वोट करेगी।

इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के पास 2017 में 5 सीटें थीं, इस बार इसकी संख्या 15 तक ले जाने का टारगेट है। इस बार युवाओं और समाज के सभी तबकों पर कांग्रेस ने दांव लगाया है। यही कारण है कि विरोध के स्वर भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। हमें उम्मीद है कि जमीन से जुड़े कार्यकता को इस बार जनता पसंद करेंगी।

- प्रफुल्ल गुडधे, राष्ट्रीय महासचिव, कांग्रेस

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट

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