नागपुर मिशन लक्ष्यवेध के धावक अनिकेत नलावड़े पर NADA की कार्रवाई।
मूत्र के नमूने में प्रतिबंधित स्टेरॉयड का मेटाबोलाइट मिलने की रिपोर्ट।
खिलाड़ी को बी-सैंपल जांच कराने का विकल्प दिया गया।
निजी कोच के पास प्रशिक्षण लेने वाले अन्य खिलाड़ियों की निगरानी पर सवाल।
खेल विभाग ने जानकारी जुटाकर जांच कराने की बात कही।
Nagpur Mission Lakshyavedh NADA Doping Case: नागपुर में मिशन लक्ष्यवेध योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाले धावक अनिकेत अनिल नलावड़े के डोपिंग नमूने में प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड मेटांडीइनोन का मेटाबोलाइट मिलने की जानकारी सामने आई है। NADA ने अंतिम निर्णय तक उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित किया है। मामले के बीच खिलाड़ियों के निजी कोच के पास प्रशिक्षण लेने और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अनिकेत के मूत्र का नमूना 3 सितंबर को नागपुर शहर में प्रतियोगिता के बाहर लिया गया था। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला में जांच के दौरान नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ की मौजूदगी दर्ज की गई। इसके बाद NADA ने 14 अक्टूबर को जारी नोटिस के माध्यम से उन्हें मामले का अंतिम निर्णय होने तक अस्थायी रूप से निलंबित करने की कार्रवाई की।
नोटिस के अनुसार, खिलाड़ी को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। उन्हें बी-सैंपल की जांच कराने का अधिकार भी है, जिसके लिए 33,150 रुपये शुल्क निर्धारित बताया गया है। खिलाड़ी नियमानुसार आरोपों को चुनौती देकर सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रख सकते हैं।
यदि प्रतिबंधित पदार्थ की मौजूदगी की पुष्टि होती है और डोपिंग नियमों का उल्लंघन स्थापित हो जाता है, तो लागू नियमों के तहत चार साल तक की अयोग्यता का प्रावधान लागू हो सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय जांच, खिलाड़ी के स्पष्टीकरण और संबंधित नियमों के आधार पर होगा।
मिशन लक्ष्यवेध योजना के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए विभागीय कोच उपलब्ध होने के बावजूद कुछ खिलाड़ियों के नागपुर विश्वविद्यालय में एक निजी कोच के पास अभ्यास करने जाने का मुद्दा पहले भी उठ चुका है। बताया जाता है कि अनिकेत भी उसी कोच के पास प्रशिक्षण लेते हैं। खेल विभाग के उपसंचालक की ओर से निजी कोच के पास प्रशिक्षण की अनुमति दिए जाने की बात भी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, योजना से जुड़े आधा दर्जन से अधिक अन्य खिलाड़ी भी वहां प्रशिक्षण ले रहे हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खानपान और सप्लीमेंट सेवन की निगरानी तथा प्रतिबंधित पदार्थों के जोखिम को लेकर दिए जाने वाले मार्गदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल डोपिंग रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रतिबंधित पदार्थ खिलाड़ी के शरीर में कैसे पहुंचा या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
खेल उपसंचालक महादेव कासगावड़े ने कहा कि फिलहाल मामले की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने जानकारी जुटाकर जांच कराने और उसके बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। अब मामले में बी-सैंपल जांच, खिलाड़ी का पक्ष और प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की जांच अहम होगी।