प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया ) 
नागपुर

मेडिकल अस्पताल बना सहारा, 40 लावारिस मरीजों को परिवार से मिलाया, हर महीने 8 से 10 मरीजों को मिलती नई जिंदगी

Nagpur News: नागपुर मेडिकल अस्पताल हर महीने 8 से 10 लावारिस मरीजों का इलाज व पुनर्वास करता है, अत्याधुनिक सुविधाओं और सामाजिक संगठनों की मदद से कई मरीजों को उनके परिवारों से मिलाया जा रहा है।

रूपम सिंह

Nagpur Government Hospital News: शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल पिछले वर्षों से लावारिस के तौर पर भर्ती होने वाले मरीजों के लिए मददगार साबित हुआ है। अब तक कइयों को उनके परिवार से भी मिलाया गया है। स्थिति यह है कि हर महीने करीब 8-10 लावारिस मरीज भर्ती होते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मेडिकल में अत्याधुनिक वैद्यकीय सुविधाओं के लिए निधि उपलब्ध कराई है। इससे परिसर सौंदर्याकरण सहित रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हुई हैं। रास्ते में लावारिस स्थिति में मिलने वाले मरीजों को मेडिकल में पूरी मदद की जाती है।

पुलिस या सामाजिक संगठन मरीजों को अस्पताल में दाखिल कराते हैं। आयुष्मान भारत, महात्मा फुले जन स्वास्थ्य योजना के माध्यम से इलाज किया जाता है। इलाज के बाद उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी सामाजिक सेवा विभाग की होती है। जिन मरीजों की पहचान मुश्किल होती है, उनका खर्च सामाजिक सेवा विभाग करता है। इसके लिए विविध सामाजिक संगठन, दानदाता द्वारा आर्थिक मदद की जा रही है। कई बार मरीज बातचीत करने की हालत में नहीं होते। अलग-अलग भाषा, बोली के होने के कारण दिक्कतें भी आती हैं। 2025 में करीब 40 मरीजों को उनके परिजनों तक पहुंचाया गया लेकिन जिनके परिजन नहीं मिलते, उनका पुनर्वास सामाजिक संगठनों की मदद से किया जाता है।

देना पड़ता है आधार

वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे ने कहां है कि, हर महीने 8 से 10 ऐसे मरीज मेडिकल में भर्ती होते हैं जिनका कोई रिश्तेदार नहीं होता। इन मरीजों को मानसिक आधार देना पड़ता है। लावारिस मरीजों का इलाज और उन्हें ठीक करना हमारी जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इसके लिए पूरी कोशिश करती है। जब ये मरीज ठीक होकर घर जाते हैं, तो यह हमारे लिए खुशी का पल होता है।

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