हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

प्राइवेट टीचर्स को बड़ी राहत! नागपुर High Court ने निजी कॉलेज स्टाफ की जनगणना ड्यूटी पर लगाई रोक, जानें कारण

Nagpur High Court: नागपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। निजी कॉलेजों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से राहत। इंचार्ज अधिकारी के आदेश पर लगी रोक। जानें क्या है पूरा कानूनी मामला।

प्रिया जैस

High Court Census Duty Stay: नागपुर हाई कोर्ट ने निजी गैर-अनुदानित कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों को एक बड़ी राहत देते हुए उन्हें जनगणना कार्य में लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश आगामी विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के मद्देनजर छात्रों के शैक्षिक हितों को देखते हुए काफी अहम माना जा रहा है। ‘द सिख एजुकेशन सोसाइटी, नागपुर’ और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से हाई कोर्ट (High Court) में रिट याचिका दायर की गई।

याचिका में इंचार्ज अधिकारी द्वारा 5 और 6 अप्रैल 2026 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे अधिवक्ता पुरुषोत्तम पाटिल ने कहा कि इन आदेशों में याचिकाकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से जनगणना कार्य में शामिल होने का निर्देश दिया गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ड्यूटी पर उपस्थित न होने वाले कर्मचारियों के खिलाफ इंचार्ज ऑफिसर द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट तक दर्ज करा दी गई।

इंचार्ज अधिकारी को कानूनी अधिकार नहीं

याचिका में बताया गया कि जनगणना अधिनियम 1948 (Census Act, 1948) की धारा 4 की उप-धारा (4) और जनगणना नियम 1990 के नियम 3 के तहत राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक ‘इंचार्ज ऑफिसर’ को अपने स्तर पर आगे अन्य जनगणना अधिकारियों को नियुक्त करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट (High Court) के ही ‘गोकुल श्रीरंग मुंडे बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले और गुजरात हाई कोर्ट के 2019 के एक फैसले का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया कि जनगणना कार्य के लिए निजी अनुदानित/गैर-अनुदानित कॉलेजों के कर्मचारियों की सेवाएं नहीं ली जा सकतीं, उन्हें इससे बाहर रखा गया है। साथ ही यह भी चिंता जताई गई कि जनगणना का काम लंबे समय तक चलता है जिससे आगामी विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के समय छात्रों की पढ़ाई का भारी नुकसान होगा।

तत्काल प्रभाव से लगा दी रोक

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने 10 अप्रैल 2026 को मामले की सुनवाई की। अदालत ने इस कानूनी प्रश्न को गंभीरता से लिया कि क्या एक इंचार्ज ऑफिसर, जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 4(4) का उपयोग करते हुए आगे जनगणना अधिकारी नियुक्त कर सकता है।

इन दलीलों को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने 5 और 6 अप्रैल 2026 को इंचार्ज ऑफिसर द्वारा जारी किए गए आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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