आरटीई, शिक्षा का अधिकार, हाई कोर्ट, (सोर्स सोशल मीडिया) 
नागपुर

RTE की बकाया फीस पर नागपुर HC का बड़ा फैसला: राज्य सरकार 4 हफ्ते में पूरी करे स्क्रूटनी, 2 हफ्ते में दे भुगतान

RTE Fee Payment: नागपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 2019-20 से लंबित RTE फीस दावों की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर पात्र निजी स्कूलों को अगले 2 सप्ताह के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।

अंकिता पटेल

Nagpur RTE Fee Reimbursement Order: नागपुर शिक्षा के अधिकार के तहत दिए गए प्रवेश को लेकर राज्य सरकार की ओर से भुगतान नहीं किए जाने पर लिटल एंजेल हाई स्कूल की ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई।

याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों की बकाया फीस प्रतिपूर्ति के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह वर्ष 2019-2020 से लंबित आरटीई फीस दावों की छंटनी (स्क्रूटनी) 4 सप्ताह के भीतर पूरी करे और पात्र स्कूलों को अगले दो सप्ताह के भीतर बकाया राशि का भुगतान करे।

7 वर्षों से नहीं हुई प्रतिपूर्ति

  • याचिकाकर्ता स्कूलों की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को बताया कि उनके स्कूल आरटीई एक्ट, 2009 की धारा 2(n) के तहत आते हैं।
  • अधिनियम की धारा 12(2) के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित 25% आरटीई कोटे के तहत छात्रों को दी जाने वाली मुफ्त शिक्षा के खर्च की प्रतिपूर्ति करना सरकार के लिए अनिवार्य है।
  • स्कूलों ने दावा किया कि उन्हें शैक्षणिक वर्ष 2019-2020 से इस फीस की प्रतिपूर्ति नहीं की गई है, जिससे उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • इस फैसले से आरटीई के तहत मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रहे उन तमाम निजी स्कूलों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका लाखों-करोड़ों का फंड राज्य सरकार के पास कई सालों से अटका हुआ है।

तय की गई समय सीमा, 4 हप्ते दिए

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रत्येक याचिकाकर्ता स्कूल की पात्रता और देय राशि की जांच करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। स्कूटनी के बाद जो भी राशि स्कूलों के लिए देय होगी, उसे अगले 2 सप्ताह के भीतर जारी करना होगा।

यदि सरकार की जांच में कोई स्कूल भुगतान के लिए अपात्र पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को उस प्रभाव का स्पष्ट आदेश पारित करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई स्कूल दावे के पूरी तरह से खारिज होने या आंशिक भुगतान से असंतुष्ट होता है, तो वह कानून के दायरे में रहकर आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा।

पिछले फैसलों का दिया गया हवाला

अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान इसी तरह के विवादों पर हाई कोर्ट की मुख्य पीठ और औरंगाबाद बेंच द्वारा दिए गए पिछले फैसलों (जैसे विवेकानंद अकादमी और महाराष्ट्र बहुउद्देशीय सामाजिक संस्था के मामलों) का भी संदर्भ दिया गया, जिन्हें 2023 और 2024 में सुलझाया गया था। इन्हीं फैसलों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि राज्य सरकार को उनके दावों की जांच कर जल्द भुगतान का निर्देश दिया जाए।

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