नागपुर के फूड इंफ्लूएंसर 'Guddu Gareeb' (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

Nagpur के 'Guddu Gareeb' का जलवा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर जो रील बनाकर खिला रहा हजारों को भंडारे का महाप्रसाद

Nagpur Food Influencer: नागपुर के किस कोने में भंडारा चल रहा है यह पता नहीं चलता था। इसी समस्या का समाधान बनकर उभरे हैं गुड्डू पटेल, जिन्हें सोशल मीडिया पर 'गुड्डू गरीब' के नाम से जाना जाता है।

आकाश मसने

Guddu Gareeb Food Influencer: कहते हैं कि श्रद्धा और स्वाद का जो संगम 'महाप्रसाद' या 'भंडारे' में मिलता है, वह बड़े से बड़े फाइव स्टार होटल में भी नसीब नहीं होता। संतरों की नगरी नागपुर में भंडारों की एक लंबी परंपरा रही है, लेकिन अक्सर लोगों को यह पता नहीं चल पाता कि शहर के किस कोने में भंडारा चल रहा है। इसी समस्या का समाधान बनकर उभरे हैं गुड्डू पटेल, जिन्हें सोशल मीडिया की दुनिया अब 'गुड्डू गरीब' के नाम से जानती है।

पिछले कुछ समय से इंस्टाग्राम पर एक युवक की रील जबरदस्त तरीके से वायरल हो रही है। ‘गरीब’ कहलाने वाला गुड्डू नागपुर शहर के महाप्रसाद प्रेमियों का पेट भरता है। त्योहार शुरू होते ही भंडारों के आयोजन शुरू हो जाते हैं लेकिन इन भंडारों की जानकारी हर व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाती। बस यही काम करता है ‘गुड्डू गरीब।’

आयोजनों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर करता है शेयर

गुड्डू को शहर के हर एक महाप्रसाद आयोजन की जानकारी मिल जाती है। वह इन आयोजनों की रील बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल देता है। उसकी हर एक रील को हजारों व्यू मिलते हैं, वहीं लाइक और शेयर करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। सबसे ज्यादा प्रतिसाद उसे हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से मिलता है जो मेस का खाना खा-खाकर पक चुके हैं और भंडारे के स्वादिष्ट भोजन की तलाश में रहते हैं। माना जाता है कि जितने भंडारे नागपुर शहर में होते हैं उतने देश के किसी राज्य में नहीं। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर गुड्डू पटेल नामांकित कंपनी में काम करता है। बचपन से ही उसे महाप्रसाद का भोजन बहुत पसंद था। जहां उसे भंडारे की जानकारी मिलती गुड्डू अपने साथी अल्पेश के साथ पहुंच जाता। महाप्रसाद के स्वादिष्ट भोजन का वीडियो बनाकर इंस्टा पर रील डालता। उसके वीडियो देखकर साथी ‘गरीब’ कहकर चिढ़ाने लगे।

कैसे शुरू हुआ ‘गुड्डू गरीब’ का सफर ?

ऐसा नहीं है कि गुड्डू यह काम गरीबी के कारण कर रहा था। इंस्टाग्राम पर उसकी रील को अच्छा प्रतिसाद मिलता था। उसकी तरह कई लोग हैं जो महाप्रसाद खाने के लिए कहीं भी जा सकते हैं। लोग कमेंट पर उससे और रील डालने की मांग करने लगे। उनका कहना था कि प्रसाद के साथ रील डालने की बजाय वह आयोजनों की जानकारी दे जिससे अन्य लोग भी भंडारे के प्रसाद का लुत्फ उठा पाएं। बस क्या था, गुड्डू ने दोस्तों द्वारा दिए गए गरीब नाम से ही ‘गुड्डू गरीब’ नाम का पेज बना लिया।

जब एक रील देख पहुंच गए 5,000 लोग

गुड्डू ने बताया कि शहर में महाप्रसाद के प्रेमी कम नहीं हैं, इसीलिए जहां भी जानकारी मिलती थी, वह रील बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल देता था। कई बार इससे परेशानी भी हुई। एक जगह पर 500 लोगों के भोजन की व्यवस्था थी, उसकी रील देखकर 5,000 लोग कार्यक्रम में पहुंच गए और प्रसाद मिनिटों में खत्म हो गया। तब से वह केवल बड़े आयोजनों की ही रील बनाता है। अब हाल ये है कि भंडारों का आयोजन करने वाले खुद उसे इन्विटेशन भेजते हैं। आयोजकों को परेशानी न हो इसीलिए वह व्यवस्था और मेन्यू के साथ पूरी जानकारी रील में डाल देता है।

19,000 फॉलोवर्स, 10 मिलियन व्यू

गुड्डू की रील को जबरदस्त प्रतिसाद मिलता है। उसके पेज पर महाप्रसाद प्रेमियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में उसके 19,000 फॉलोवर्स हैं और यह संख्या बढ़ती जा रही है। त्योहारों के समय उसके पेज पर 10 से 12 मिलियन व्यू आ जाते हैं। गुड्डू ने बताया कि राम नवमी पर वह किसी काम से मुंबई चला गया। वहां उसे एक भी भंडारा नहीं मिला और बड़ा दुख हुआ। भंडारे के भोजन का आनंद ही कुछ और होता है। ऐसा टेस्ट आपको किसी होटल के भोजन में नहीं मिलता। यही कारण है कि उसकी रील को बड़ी संख्या में लोग लाइक करते हैं। बाहरी शहर और राज्यों में काम करने वाले सिटी के लोग महाप्रसाद नहीं मिलने पर दुखी होने वाले मैसेज करते हैं। इससे समझा जा सकता है कि लोग भंडारों का प्रसाद ग्रहण करने के लिए कितने आतुर रहते हैं।

- नवभारत लाइव के लिए नागपुर से अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट

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