बाल्या बोरकर को हाई कोर्ट ने दी राहत (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

बाल्या बोरकर समेत 8 को हाई कोर्ट से मिली राहत, दही-हांडी मामले में जारी 'गैर-जमानती वारंट' रद्द, जानें मामला

Balya Borkar Bail: बाल्या बोरकर सहित 8 को बड़ी राहत! नागपुर कोर्ट ने 2019 के दही-हांडी मामले में दी जमानत। गैर जमानती वारंट रद्द, 15 हजार के मुचलके पर रिहाई।

प्रिया जैस

Nagpur Court News: बिना अनुमति दही-हांडी आयोजन के मामले में अदालत ने मनपा में सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर समेत 8 आरोपियों को बड़ी राहत दी है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी एनबी पाटिल ने सभी को जमानत देते हुए उनके खिलाफ जारी गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट रद्द करने का आदेश दिया।

मामले में बिना अनुमति दही-हांडी आयोजित करने, डीजे बजाने और सड़क पर यातायात बाधित करने के आरोप में कुल 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों में नरेंद्र उर्फ बाल्या बोरकर, दत्तात्रय बारस्कर, सुरेश हाडगे, गणेश मौंदेकर, विजय शेंद्रे, मनोज झाड़े, राजेश उराडे और राजकुमार बोंद्रे का समावेश था।

गैर जमानती वारंट किया था जारी

इन सभी के खिलाफ वर्ष 2019 में लकड़गंज थाने में धारा 341, 336, 283, 188, 114 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने वर्ष 2021 में इस मामले में आरोप पत्र भी पेश किया था। इसके बावजूद आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए और न ही जमानत ली जिसके चलते अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता वासुदेव कापसे ने पक्ष रखते हुए कहा कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और आरोप पत्र में प्रथमदृष्टया कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को प्रति 15,000 रुपये के मुचलके पर जमानत मंजूर कर दी। उनके खिलाफ जारी वारंट भी रद्द कर दिया।

मनोरुग्णालय के वैद्यकीय अधीक्षक के निलंबन का विरोध

प्रादेशिक मनोरुग्णालय के वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. सतीश हुमने को निलंबित किये जाने से नाराज कर्मचारियों व अधिकारियों ने बुधवार को विरोध प्रकट करते हुए काली फीत लगाकर काम किया। कर्मचारियों का कहना है कि डॉ. हुमने ने अपने कार्यकाल में अनेक सुधार किये, जिसके परिणाम अब देखने को भी मिल रहे हैं। इस बीच उनका निलंबन व्यवस्था को लड़खड़ाने जैसा है।

मरीजों को पर्याप्त दवाइयां मिल रही हैं। अस्पताल में सीसीटीवी व्यवस्था, ई-हॉस्पिटल प्रणाली, सीएसआर से उपकरणों की खरीदी, शासकीय योजनाओं को लागू करने जैसे अनेक कार्य हुये हैं। इसके बाद भी निलंबन की कार्यवाही कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ने वाली है। जल्द ही मामले की जांच कर निलंबन को वापस लिया जाये।

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