Nagpur APK File Fraud: नागपुर जिले में साइबर ठगों ने ई-चालान के नाम पर एक व्यापारी को निशाना बनाते हुए उसके बैंक खाते से 9.69 लाख रुपये उड़ा लिए। ठगों ने पहले व्यापारी के मोबाइल पर फर्जी ई-चालान का संदेश भेजा और उसमें एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा। जैसे ही व्यापारी ने फाइल डाउनलोड की, उसका मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया।
इसके बाद आरोपियों ने मोबाइल का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर यूपीआई के जरिए अलग-अलग खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए। मामला सामने आने के बाद नंदनवन पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, हिवरीनगर निवासी सचिन मनोहर येनकर (47) लकड़गंज क्षेत्र में श्रीकृष्ण ऑटोमोबाइल नाम से दुकान संचालित करते हैं। उनका बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता है और कारोबार से जुड़े अधिकांश लेनदेन इसी खाते से होते हैं।
शिकायत के अनुसार, 23 जुलाई की शाम सचिन के मोबाइल पर एक संदेश आया, जिसमें बताया गया कि उनके वाहन का ई-चालान लंबित है। संदेश के साथ एक APK फाइल भेजी गई थी और उसे डाउनलोड करने का निर्देश दिया गया। साथ ही एक ओटीपी संबंधी संदेश भी प्राप्त हुआ, जिससे पूरा मैसेज असली प्रतीत हुआ।
सचिन ने बिना संदेह किए APK फाइल डाउनलोड कर ली। फाइल इंस्टॉल होते ही मोबाइल की पूरी एक्सेस साइबर ठगों के हाथ में चली गई। इस दौरान मोबाइल सामान्य रूप से काम करता हुआ दिखाई देता रहा, जिससे उन्हें किसी प्रकार की गड़बड़ी का आभास नहीं हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि मोबाइल हैक होने के बाद आरोपियों ने पीड़ित के फोन का उपयोग कर UPI ट्रांजेक्शन के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में कुल 9.69 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कुछ समय बाद मोबाइल सामान्य रूप से काम करने लगा, लेकिन जब सचिन ने अपने बैंक खाते की जांच की तो लाखों रुपये डेबिट होने का पता चला। इसके बाद उन्होंने तत्काल बैंक से संपर्क किया। बैंक अधिकारियों ने लेनदेन की जांच करने पर साइबर ठगी की पुष्टि की। इसके बाद सचिन ने नंदनवन थाने में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर नंदनवन पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ट्रांजेक्शन का डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। साथ ही साइबर सेल की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन खातों में भेजी गई और उसके बाद उसे कहां ट्रांसफर किया गया।
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पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से प्राप्त APK फाइल, लिंक या ऐप डाउनलोड न करें। सरकारी विभाग, बैंक या ट्रैफिक पुलिस कभी भी ई-चालान के लिए APK फाइल भेजकर डाउनलोड करने को नहीं कहते।
यदि ई-चालान संबंधी कोई संदेश प्राप्त हो तो उसकी पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत मोबाइल ऐप के माध्यम से ही करें। किसी भी संदिग्ध लिंक, फाइल या ओटीपी को साझा करने से बचें और साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।