वायु प्रदूषण (AI Generated Image) 
नागपुर

CPCB की डरावनी रिपोर्ट: नागपुर के इन 4 इलाकों की हवा सबसे खराब, क्या आप भी हैं खतरे में?

Nagpur Air Quality: नागपुर की हवा में जहर! महल क्षेत्र में 180 दिन प्रदूषित रही हवा। सीपीसीबी 2025 की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा। अस्थमा और कैंसर का बढ़ा खतरा। पूरी रिपोर्ट।

प्रिया जैस

CPCB Report Nagpur Data: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वर्ष 2025 के आंकड़ों के आधार पर नागपुर शहर की वायु गुणवत्ता को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। पर्यावरण विशेषज्ञ और ‘ग्रीन प्लैनेट सोसाइटी2 के अध्यक्ष प्रा। सुरेश चोपणे द्वारा तैयार इस शोध रिपोर्ट के अनुसार नागपुर के 4 प्रमुख केंद्रों में से महल क्षेत्र में वर्ष के 365 दिनों में से 180 दिन हवा प्रदूषित रही।

प्रमुख केंद्रों का वार्षिक रिपोर्ट कार्ड (2025)

केंद्र का नाम प्रदूषित दिन (180+ AQI) स्वच्छ/संतोषजनक दिन स्थिति
महल 180 185 अत्यधिक चिंताजनक
जीपीओ 174 191 गंभीर
रामनगर 154 211 मध्यम
अंबाझरी 137 228 सबसे सुरक्षित

क्षेत्रवार विस्तृत विश्लेषण (AQI श्रेणियां)

महल (सर्वाधिक प्रदूषित) : यहां 35 दिन ‘अच्छी’, 150 दिन ‘संतोषजनक’ और 156 दिन ‘मध्यम’ श्रेणी की हवा रही। चिंताजनक बात यह है कि 23 दिन ‘खराब’ और 1 दिन ‘बेहद खराब’ हवा दर्ज की गई। सर्दियों में यहां 78 दिन प्रदूषण रहा।

जीपीओ : यहां 174 दिन प्रदूषण रहा। सर्दियों के दौरान स्थिति अधिक गंभीर रही जहां 74 दिन प्रदूषित और 9 दिन अत्यधिक प्रदूषित श्रेणी में पाए गए।

रामनगर : यहां 95 दिन हवा ‘अच्छी’ रही, जबकि 142 दिन मध्यम और 12 दिन ‘खराब’ श्रेणी में रहे। सर्दियों में यहां 12 दिन अत्यधिक प्रदूषण दर्ज किया गया।

अंबाझरी (सबसे सुरक्षित) : यहां के 365 में से 228 दिन बेहतर रहे। केवल 12 दिन ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किए गए। मानसून के दौरान यहां की हवा सबसे शुद्ध पाई गई।

प्रमुख प्रदूषक और उनके खतरे

रिपोर्ट के अनुसार नागपुर की हवा में सबसे अधिक मात्रा पीएम 10 और पीएम 2.5 (सूक्ष्म धूल कण) की पाई गई। इसके बाद जमीन पर ओजोन गैस का बढ़ता स्तर स्वास्थ्य के साथ-साथ प्लास्टिक और रबर की वस्तुओं के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। कार्बन मोनोऑक्साइड का प्रभाव भी कुछ दिनों तक देखा गया।

प्रदूषण के स्रोत और स्वास्थ्य पर प्रभाव

चोपणे ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण भारी यातायात, वाहनों का धुआं, थर्मल पावर स्टेशन और औद्योगिक इकाइयां हैं। इसके अलावा कचरा जलाना और निर्माण कार्य की धूल भी जिम्मेदार है। वायु प्रदूषण के कारण नागपुर में अस्थमा, टीबी, कैंसर, हृदय रोग और त्वचा रोगों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

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