Nagpur Municipal Corporation Development Works: नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र में ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। महापौर नीता ठाकरे ने प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं कि शहर में चल रहे कम से कम 10 प्रतिशत विकास कार्यों का किसी प्रतिष्ठित त्रयस्थ संस्था (थर्ड पार्टी) द्वारा ऑडिट कराया जाए। मनपा मुख्यालय में मंगलवार को महापौर की अध्यक्षता में टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक सुधारों के मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में उपमहापौर लीला हाथीबेड, अतिरिक्त आयुक्त मिलिंद मेश्राम सहित कई प्रमुख अधिकारी और नागपुर मनपा कॉन्ट्रैक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित थे।
शहर में चल रहे कुछ कार्यों की खराब गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने निर्देश दिया कि IIT मुंबई या COEP जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से सीवर लाइन, सीमेंट रोड, पेवर ब्लॉक, नालों के निर्माण और अन्य सभी विकास कार्यों की गहन जांच कराई जाए, निविदा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन को 'वर्क मॉड्यूल' प्रणाली लागू करने के भी निर्देश दिए गए हैं। महापौर ने ठेकेदारों से ली जाने वाली सुरक्षा जमा राशि को बढ़ाने पर विचार करने को कहा है। इसके अलावा मनपा के सभी सिविल कार्यों में 'वाटर हार्वेस्टिंग' को अनिवार्य करने और ईपीएफ के मुद्दे पर कानूनी सलाह लेने के भी निर्देश दिए गए हैं।
स्थायी समिति की सभापति शिवानी दाणी ने भी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए 'वर्क मॉड्यूल' जैसी प्रभावी नीति बनाने पर जोर दिया, वहीं सत्तापक्ष के नेता बाल्या बोरकर ने कहा कि यदि कोई निविदा अनुमानित दर से कम दर पर आती है तो पहले की तरह उसकी गहन जांच की जानी चाहिए।
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उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी विकास कार्य में निधि (फंड) की बचत होती है तो उस शेष राशि का उपयोग उसी प्रभाग (वार्ड) में दूसरे कार्यों के लिए किया जाए और कार्यों को गति देने के लिए जोन स्तर पर ऐसे प्रस्तावों को तुरंत मंजूरी दी जाए।