मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा का खर्च कौन भरेगा? बॉम्बे हाईकोर्ट ने RSS प्रमुख की सिक्योरिटी पर कही बड़ी बात

Mohan Bhagwat Z+ Security: बॉम्बे हाईकोर्ट ने RSS प्रमुख मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा का खर्च संगठन द्वारा खुद उठाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिका को अधूरी जानकारी पर आधारित बताया।

आकाश मसने

Bombay High Court On Mohan Bhagwat Z+ Security Expenses: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत की 'जेड प्लस' (Z+) सुरक्षा को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायाधीश अनिल किलोर की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता ललन किशोर सिंह द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें मांग की गई थी कि मोहन भागवत की सुरक्षा का खर्च सरकार के बजाय स्वयं संघ को वहन करना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की 'जेड प्लस' (Z+) सुरक्षा का खर्च संगठन द्वारा खुद उठाने का आदेश देने का अनुरोध करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ललन किशोर सिंह की ओर से जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायाधीश अनिल किलोर ने दोनों पक्षों की दलीलों के बाद जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को अधूरी जानकारी पर आधारित माना और इस मांग को नामंजूर कर दिया। साथ याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए।

मोहन भागवत की सुरक्षा पर कितना खर्च होता है?

याचिकाकर्ता का मुख्य दावा यह था कि RSS प्रमुख की सुरक्षा का खर्च आम करदाताओं के पैसे से नहीं चुकाया जाना चाहिए, बल्कि इसका वहन स्वयंसेवी संस्था (RSS) को खुद करना चाहिए। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के 2023 के एक फैसले का भी हवाला दिया गया था, जिसमें कुछ विशेष मामलों में सुरक्षा का खर्च उठाने का जिक्र था, लेकिन अदालत ने इन तर्कों के बावजूद जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता का मानना था कि मोहन भागवत की सुरक्षा पर हर माह लगभग 40 से 45 लाख रुपये खर्च किया जाता है।

RSS चीफ को कब मिली Z+ सिक्योरिटी?

RSS चीफ मोहन भागवत को जून 2015 में पहली बार अखिल भारतीय स्तर की Z+ सुरक्षा प्रदान की गई थी। हालांकि, उन्हें 2012 से महाराष्ट्र पुलिस के तहत जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी। जून 2015 में केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा का जिम्मा CISF को सौंपा, जिसमें 58 से अधिक सीआईएसएफ (CISF) कमांडो उनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं।

अगस्त 2024 में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) द्वारा जारी किए गए अलर्ट के बाद खतरे को देखते हुए इस सुरक्षा को 'एडवांस सिक्योरिटी लाइसेंस' (ASL) में अपग्रेड कर दिया गया है। यह अपग्रेडेड सुरक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के स्तर की मानी जाती है। ASL सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत अब मोहन भागवत के किसी भी दौरे से पहले स्थानीय प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह से सतर्क रहते हैं।

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