प्रवीण दटके, (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर: प्री-स्कूलों की मनमानी पर भड़के विधायक प्रवीण दटके; कहा- नर्सरी के बच्चों से वसूली जा रही 1 लाख तक फीस

Nagpur Pravin Datke Demands: विधायक प्रवीण दटके ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस पर नियंत्रण, नर्सरी में भारी शुल्क वसूली पर रोक और EBC, SEBC, OBC छात्रों की फीस योजनाओं को प्रभावी बनाने की मांग की।

अंकिता पटेल

Nagpur Pravin Datke Demands Private School Fees: नागपुर जिले में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को गति देने और शिक्षा में गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से लाये गए प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक प्रवीण दटके ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए, राज्य में निजी स्कूलों, विशेषकर प्ले ग्रुप, नर्सरी और प्री-स्कूलों की बढ़ती संख्या और उनके बेलगाम 'फीस स्ट्रक्वर' पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए दटके ने कहा कि इन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।

सिटी में नर्सरी के छात्रों से 1 लाख रुपये तक की भारी भरकम फीस वसूले जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने सरकार से इस मनमानी पर तत्काल नियंत्रण लाने की मांग की। इसके अलावा ईबीसी, एसईबीसी और ओबीसी वर्ग के छात्रों और उनके अभिभावकों में फीस माफी योजनाओं को लेकर जागरूकता की कमी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने परीक्षा और शिक्षण शुल्क की नियमित प्रतिपूर्ति के लिए उचित योजना बनाने का भी सुझाव दिया।

'आकांक्षा' फाउंडेशन का सफल मॉडल

राज्य के स्कूलों में छात्रों की बढ़ती अनुपस्थिति को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चिंता का विषय बताते हुए दटके ने महानगर पालिका द्वारा 'आकांक्षा' संस्था के साथ किए गए करार की सराहना की। वर्तमान में यह संस्था मनपा के 7 स्कूल चला रही है, जहां 1800 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

इन स्कूलों को चलाने का 55% खर्च मनपा और 45% खर्च 'आकांक्षा' संस्था सीएसआर के माध्यम से उठाती है। आगामी वर्ष में 10 नए स्कूल शुरू होने जा रहे हैं। दटके ने सुझाव दिया कि नागपुर मनपा के इस 'पायलट प्रोजेक्ट' को पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जाना चाहिए ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और छात्रों का नामांकन बढ़ सके।

दटके ने रखीं ये मांगें

  • राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक समान 'एकेडमिक कैलेंडर' तैयार किया जाए।
  • 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स', क्रेडिट ट्रांसफर और 'नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क' को लागू करने के लिए स्पष्ट और समान दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
  • अध्यापकों का कार्यभार तय करने के लिए राज्य स्तरीय स्पष्ट नीति बने।
  • NEP को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए।

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