Nagpur Maha Metro NMC Land: नागपुर मेट्रो रेल परियोजना (चरण-1) को गति देने और इसके व्यावसायिक विकास के लिए महानगरपालिका ने अपनी अहम जमीनों को महा-मेट्रो को ‘फ्री-होल्ड’ (मालिकाना हक) आधार पर हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। इस बहुप्रतीक्षित कदम से मेट्रो के बुनियादी ढांचे और वित्तीय सुदृढ़ीकरण को बड़ा बल मिलेगा।
राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के 30 जनवरी 2014 के निर्णय के अनुसार नागपुर मेट्रो रेल परियोजना में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की 20-20 प्रतिशत की वित्तीय हिस्सेदारी है। वहीं महानगरपालिका और प्रन्यास की 5-5 प्रतिशत हिस्सेदारी तय की गई है, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि कर्ज और अन्य स्रोतों से जुटाई जानी है।
मनपा के 5 प्रतिशत वित्तीय योगदान के तहत उसे कुल 434 करोड़ रुपये देने हैं। इसमें से 73 करोड़ रुपये पूंजीगत कार्यों के लिए और 361 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण के लिए उपलब्ध कराए जाने हैं। दोनों संस्थाओं के बीच 15 जनवरी 2019 को एक समझौता भी हस्ताक्षरित हो चुका है।
मनपा की 20 अगस्त को होने जा रही आम सभा में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा जहां इसे मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। प्रस्ताव को मंजूरी देते समय पूरी जानकारी सदन में रखी जा रही है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2024 तक मनपा ने 73 करोड़ रुपये के पूंजीगत योगदान में से 15 करोड़ रुपये महा-मेट्रो को दे दिए हैं।
इसके अलावा इसी तारीख तक 'TOD Premium' के अंतर्गत 14.81 करोड़ रुपये भी महा-मेट्रो को सौंपे जा चुके हैं। भूमि अधिग्रहण के 361 करोड़ रुपये के हिस्से में से अब तक 74.21 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन हस्तांतरित की गई है। हालांकि इस राशि के समायोजन का प्रमाणपत्र महा-मेट्रो से मिलना बाकी है।
इससे पूर्व चरण-1 के लिए मनपा की 8 जगहें महा-मेट्रो को दी गई थीं जिनसे प्राप्त लाभ का 50% मनपा को मिलेगा। इन जमीनों का 69,74,84,906 रुपये का मूल्यांकन समायोजित किया जाना है।
इसके साथ ही टेलीफोन एक्सचेंज चौक की जमीन (6662.238 वर्गमीटर) का 8 वर्ष का किराया 93,09,544 रुपये और 489 वर्गमीटर की एक अन्य जमीन के 4,23,47,400 रुपये मिलाकर कुल 74,91,41,850 रुपये की भारी-भरकम राशि महा-मेट्रो के पास समायोजित होना आवश्यक है।
मेट्रो के अंतरराष्ट्रीय बैंकों से लिए गए कर्ज को चुकाने और परियोजना के व्यावसायिक दृष्टिकोण से विकास के लिए 99 वर्ष की लीज पर दी गई मनपा की जमीनों को बिना शर्त ‘फ्री-होल्ड’ करने का प्रस्ताव लाया गया है। राज्य सरकार के 28 अप्रैल 2025 के निर्णय के अनुसार महाराष्ट्र नागपुर महानगरपालिका अधिनियम 1949 की धारा 450 (अ) के तहत इस हस्तांतरण को मान्यता दी गई है।
1. पुराना जलप्रदाय कार्यालय, सीताबर्डी : 4662.00 वर्गमीटर जमीन जिसका मूल्यांकन 39,66,69,300 रुपये है. (10% रूपांतरण प्रीमियम : 3,96,66,930 रुपये)।
2. खोवा बाजार, कॉटन मार्केट (पिलर की जगह) : 47.20 वर्गमीटर, मूल्यांकन 34,73,448 रुपये. (प्रीमियम : 3,47,344 रुपये)।
3. मनपा हिंदी भाषी स्कूल, कॉटन मार्केट : 662.68 वर्गमीटर, मूल्यांकन 3,51,15,413 रुपये. (प्रीमियम : 35,11,541 रुपये)।
4. माता मंदिर, वर्धा रोड : 1000.00 वर्गमीटर, मूल्यांकन 4,69,50,000 रुपये. (प्रीमियम : 46,95,000 रुपये)।
5. इंदिरा गांधी अस्पताल, अंबाझरी : 193.34 वर्गमीटर, मूल्यांकन 1,19,31,011 रुपये. (प्रीमियम : 11,93,101 रुपये)।
6. तुलसी हिंदी प्राथमिक स्कूल, सीताबर्डी : 1828.56 वर्गमीटर, मूल्यांकन 15,10,39,056 रुपये. (प्रीमियम : 1,51,03,905 रुपये)।
शुरुआती सूची में ‘मनपा संतरा मार्केट सीताबर्डी’ और ‘मनपा महात्मा फुले मार्केट’ को भी शामिल किया गया था लेकिन 30 जुलाई 2024 के एक पत्र के अनुसार अब इन दोनों जगहों का विकास महा-मेट्रो के बजाय ‘महाराष्ट्र राज्य बुनियादी ढांचा विकास निगम’ (MSIDC) द्वारा किया जाएगा, इसलिए इन्हें महा-मेट्रो को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव से अलग रखा गया है।