स्मार्ट बिजली मीटर, (सोर्स: सोशल मीडिया)  
नागपुर

नागपुर स्मार्ट मीटर विवाद: RTI का बड़ा खुलासा, मौजूदा मीटर बदलना कितना जरूरी?

Nagpur Smart Electricity Meter: RTI से मिली जानकारी के अनुसार, विद्युत (ग्राहकों के अधिकार) नियम, 2020 में स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता नए कनेक्शनों के लिए बताई गई है। मौजूदा मीटर बदलने पर सवाल उठे है।

अंकिता पटेल

Nagpur Electricity Consumers: नागपुर महाराष्ट्र में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर चल रहे विवाद के बीच महावितरण की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जहां एक ओर राज्यभर में स्मार्ट मीटर के विरोध में आवाजें तेज हो रही हैं वहीं आरटीआई से मिली जानकारी ने इस मामले में एक नया मोड़ ला दिया है।

आरटीआई का खुलासा

अधिवक्ता संदीप बदाना द्वारा आरटीआई के माध्यम से जुटाई गई जानकारी के अनुसार 'विद्युत (ग्राहकों के अधिकार) नियम, 2020' के तहत स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता केवल नए बिजली कनेक्शन के लिए है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में यह स्पष्ट हुआ है कि मौजूदा पोस्टपेड मीटरों को तुरंत बदलने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।

अधिवक्ता बदाना के अनुसार केंद्र सरकार के नियमों में मौजूदा सही हालत वाले मीटरों को जबरन बदलने का कोई प्रशासनिक आदेश नहीं है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया का उल्लेख तो है लेकिन केंद्र सरकार ने मौजूदा मीटरों को बदलने के

उपभोक्ता की सहमति का उल्लंघन

रिपोर्ट में सबसे चौकाने वाला दावा यह है कि महावितरण के नियमों के अनुसार किसी भी ग्राहक का मीटर बदलने से पहले उन्हें लिखित सूचना या नोटिस देना अनिवार्य है। हालांकि कई क्षेत्रों में बिना किसी पूर्व सूचना के मीटर बदले जा रहे है और कहीं-कहीं तो विरोध होने पर पुलिस सुरक्षा का सहारा लिया जा रहा है।

आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया गया है कि मोटे कालों लिमिटेड जैसी निजी कंपनियों के पास बिना उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति के उनके निजी परिसर में प्रवेश करके सही स्थिति वाले मीटर निकालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

एक तरफ महावितरण ने उच्च न्यायालय में शपथ पत्र देकर स्पष्ट किया है कि ग्राहकों पर स्मार्ट मीटर थोपे नहीं जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर धरातल पर हो रही जबरन मीटर बदलने की कार्रवाई से भारी असंतोष है। अब यह पूरा मामला उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई में बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है क्योंकि यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि बिना किसी कानूनी आधार के यह मीटर बदलने की मुहिम किस नियम के तहत चलाई जा रही है।

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