चंद्रशेखर बावनकुले (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

RTO में 'हमाम' का पर्दाफाश: 100 अफसरों ने अपने ही विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा, बावनकुले तक पहुंची चिट्ठी!

RTO Corruption Racket: महाराष्ट्र RTO में वसूली रैकेट का पर्दाफाश! 100 निरीक्षकों ने मंत्री बावनकुले से की शिकायत। जानें कौन है इस 'सिंडिकेट' का मास्टरमाइंड और क्या है SIT की मांग।

प्रिया जैस

RTO Syndicate: महाराष्ट्र परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। कोई भी मुख्यमंत्री हो या राजस्व मंत्री या फिर परिवहन मंत्री हो, इस विभाग के भ्रष्टाचार पर मौन ही रहा है। लेकिन इस बार 100 से अधिक मोटर वाहन निरीक्षकों ने सामूहिक रूप से महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पत्र लिखकर अपने ही विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायत की है। इस पत्र में वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने मिलकर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं जिससे विभाग 2 धड़ों ‘भ्रष्टाचारी और ईमानदार’ अधिकारियों में बंटा हुआ नजर आ रहा है।

इस सिंडिकेट (हमाम) में सब...

खास बात है कि इस पत्र में जितने भी अधिकारियों के नाम लिखे गये हैं वे सभी दागदार हैं। इससे पहले भी इन पर भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोप लगते रहे हैं। ये सभी एक सिंडिकेट चलाकर अवैध वसूली का रैकेट चला रहे हैं। पत्र में साफ तौर लिखा गया है कि विभाग का सेवानिवृत्त दागी अधिकारी बजरंग खरमाटे इस सिंडिकेट का सरदार है।

खरमाटे ही आरटीओ अधिकारी रवीन्द्र भुयार, राजू नागरे, आनंद मोड और योगेश खैरनार के साथ मिलकर सुनियोजित वसूली रैकेट चला रही है। इस पूरे काले काम में एसीबी के कुछ संशयित अधिकारी भी शामिल हैं। ये सिंडिकेट आरटीओ (RTO) की चेक पोस्ट पर अनियमित वसूली करता है।

इतना ही नहीं, मनचाहे ट्रांसफरों के लिए लाखों के लेन-देन के अलावा इनकी बात न मानने वाले आरटीओ इंस्पेक्टर या अधिकारी के खिलाफ एसीबी की कार्रवाई करके फर्जी मामलों में फंसाया जा रहा है।

इंश्योरेंस की मासिक किस्त नहीं तो ACB की रेड

सूत्रों के अनुसार, पत्र में बताए गए दागी अधिकारियों में से 2 अधिकारियों द्वारा ‘इंश्योरेंस’ के नाम पर हर महीने भारी रकम वसूली जाती है। जो अधिकारी नियमित भुगतान करते हैं उन्हें एसीबी कार्रवाई से संरक्षण दिया जाता है, जबकि भुगतान से इनकार करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कथित रूप से झूठी शिकायतों के आधार पर ट्रैप कार्रवाई करवाई जाती है।

इसके अतिरिक्त, अन्य 2 अधिकारियों द्वारा यह कहकर धमकाने की शिकायतें भी सामने आई हैं कि मासिक किस्त नहीं देने पर भी एसीबी के माध्यम से कार्रवाई करवाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले खैरनार को मुंबई एसीबी द्वारा द्वारा देवरी चेकपोस्ट पर ट्रैप किया जा चुका है।

भाई है तो फिर क्या डरना...

अंदरखाने में यह चर्चा भी जोरों पर है कि विधानसभा अधिवेशन 2025 के दौरान बेहद चर्चा में रहे एक आरटीओ (RTO) अधिकारी का भाई पहले एंटी करप्शन ब्यूरो में रह चुका है। ऐसे में इस विभाग के अन्य अधिकारियों से उसके पुराने संबंध हैं जिन्हें पूरी शिद्दत से निभाया जा रहा है। यही कारण है कि अब पूरे विभाग में इस सिंडिकेट का खौफ है कि पता नहीं, कब, किसे फर्जी ट्रैप का शिकार बना दे। इससे न केवल उनकी छवि खराब होती है बल्कि उनका करियर भी खतरे में पड़ जाता है।

SIT जांच से सामने आ जायेगा सच

शिकायतकर्ताओं ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत की आशंका है। इसलिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।

इस सिंडिकेट में शामिल सभी अधिकारियों के काल रिकार्ड, टावर लोकेशन, बैंक व्यवहार, संपत्तियां के अलावा इनके कार्यकाल में दर्ज एफआईआर की एसआईटी जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। साथ ही मांग की गई है कि एसआईटी जांच पूरी होने तक उक्त सभी अधिकारियों को राज्य के किसी भी परिवहन कार्यालय में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाये। साथ जी जांच के बाद सभी पर फौजदारी कार्यवाही हो।

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