महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

महाराष्ट्र में 5% मुस्लिम आरक्षण हो गया खत्म? राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने बताया क्या है सच

Muslim Reservation: महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। स्टेट माइनॉरिटी कमीशन के चेयरमैन प्यारे खान ने 5% आरक्षण रद्द होने पर पिछली सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

आकाश मसने

Pyare Khan On Muslim Reservation: महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मिलने वाले 5% आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। महाराष्ट्र सरकार के सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा इस संबंध में जारी पुराने 'गवर्नमेंट रेजोल्यूशन' (GR) को औपचारिक रूप से रद्द करने के फैसले पर राजनीति गरमा गई है। इस संवेदनशील मुद्दे पर स्टेट माइनॉरिटी कमीशन के चेयरमैन, प्यारे खान ने अपनी बेबाक राय रखते हुए पिछली सरकारों पर निशाना साधा है।

सिर्फ ऑर्डिनेंस था, कानून नहीं: प्यारे खान

सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट के फैसले का बचाव करते हुए महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार ने मुस्लिम समुदाय को असल में कोई ठोस आरक्षण दिया ही नहीं था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने यह आरक्षण दिया ही नहीं था। वे तो बस एक ऑर्डिनेंस (अध्यादेश) लाए थे। इसे कभी कानून के तौर पर लागू ही नहीं किया गया। अगर इसे सही प्रक्रिया के साथ कानून बनाकर लागू किया गया होता, तो आज आरक्षण रद्द होने की नौबत ही नहीं आती।

प्यारे खान के अनुसार, सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट का यह कदम एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब कोई अध्यादेश समय सीमा के भीतर कानून में तब्दील नहीं होता, तो उसे रद्द करना प्रशासनिक मजबूरी बन जाती है। उनके मुताबिक, पिछली सरकार ने केवल घोषणाएं कीं, लेकिन उन्हें धरातल पर उतारने के लिए जरूरी विधायी कदम नहीं उठाए।

मुसलमानों की स्थिति पर टिप्पणी

समुदाय की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए खान ने कहा कि पिछले 70 सालों की तुलना में आज मुस्लिम समुदाय की हालत में सुधार हुआ है। उन्होंने पिछली व्यवस्थाओं पर तंज कसते हुए पूछा कि आखिर दशकों तक सत्ता में रहने वालों ने समुदाय के लिए क्या किया? उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों की स्थिति को पहले से बेहतर और अधिक स्थिर बताया।

स्कूलों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने पर क्या बोले प्यारे खान?

प्यारे खान ने स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा देने के मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के बड़े नेता अजित पवार के निधन के समय स्कूलों को अल्पसंख्यक का दर्जा देना दुखद समाचार था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर कार्रवाई करके ये दिखा दिया है कि यहां कोई भी गड़बड़ी नहीं चलेगी। महायुति सरकार सबका साथ सबका विकास को लेकर काम कर रही है।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती कर रही है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह सच है कि बिना विधानमंडल की मंजूरी के कोई भी अध्यादेश स्थायी कानून नहीं बन सकता। अब देखना यह है कि क्या भविष्य में मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को देखते हुए सरकार कोई नया और ठोस कानून लेकर आती है या नहीं।

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