Nagpur Medical Officers Salary Crisis: महाराष्ट्र के 403 सेवांतर्गत चिकित्सा अधिकारियों का 6 महीने से वेतन लंबित होने का दावा किया गया है।
वहीं नागपुर के डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल के 7 जूनियर डॉक्टरों को 7 महीने से विद्यावेतन नहीं मिला है और वे कामबंद आंदोलन पर हैं।
त्योहारों के मौसम में जब घरों में खुशियों की तैयारी हो रही है, महाराष्ट्र के सैकड़ों डॉक्टरों के परिवार आर्थिक चिंता से जूझ रहे हैं। राज्य के 403 सेवांतर्गत चिकित्सा अधिकारियों को लगातार 6 महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा चिकित्सा अधिकारी संगठन ने किया है। इधर नागपुर के डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल में 7 जूनियर निवासी डॉक्टर भी 7 महीने से विद्यावेतन नहीं मिलने के विरोध में कामबंद आंदोलन कर रहे हैं।
नागपुर, महानगर संवाददाता। महाराष्ट्र राज्य राजपत्रित वैद्यकीय अधिकारी गट-अ संगठन के अनुसार, एनईईटी पीजी-2025 के तहत 403 सेवांतर्गत चिकित्सा अधिकारियों को पदव्युत्तर शिक्षा के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। इनमें NEET-PG, NEET-DNB और AIA-PGET के माध्यम से प्रशिक्षण लेने वाले अधिकारी शामिल हैं।
संगठन के मुताबिक प्रतिनियुक्ति के बाद अधिसंख्य पदों के निर्माण का प्रस्ताव करीब चार महीने से प्रशासनिक मंजूरी के लिए लंबित है। संगठन का कहना है कि इसी प्रक्रिया के चलते इन अधिकारियों के वेतन भुगतान में देरी हो रही है और करीब 6 महीने से वेतन नहीं मिला है।
लगातार वेतन नहीं मिलने से अधिकारियों के सामने घरेलू बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। बच्चों की स्कूल-कॉलेज फीस, गृह कर्ज की EMI, मकान का किराया, राशन और रोजमर्रा के खर्च नियमित रूप से जारी हैं। त्योहारों के अतिरिक्त खर्च ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है।
संगठन का कहना है कि कुछ अधिकारियों की ऋण किस्तें भी लंबित हो चुकी हैं। खास बात यह है कि ये अधिकारी अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ अस्पतालों में मरीजों को सेवाएं भी दे रहे हैं।
नागपुर डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल में भी जूनियर निवासी डॉक्टरों के विद्यावेतन का मामला सामने आया है। अस्पताल में बालरोग तथा स्त्रीरोग एवं प्रसूति से जुड़े स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। इन विभागों में कार्यरत 7 जूनियर डॉक्टरों का दावा है कि फरवरी से सेवाएं देने के बावजूद उनके खातों में अब तक विद्यावेतन जमा नहीं हुआ है।
डॉक्टरों के अनुसार, वे कई बार अस्पताल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर चुके हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा वरिष्ठ कार्यालय को समय पर हाजिरी पत्रक नहीं भेजे जाने के कारण विद्यावेतन अटका है।
विद्यावेतन की मांग को लेकर 7 जूनियर डॉक्टर 31 अगस्त से कामबंद आंदोलन पर हैं। आंदोलन के लंबे समय तक जारी रहने से प्रसूति, शल्यक्रिया और नवजात शिशु विभाग की नियमित व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की जानकारी सामने आई है। इससे रुग्णसेवा भी प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
अब दोनों मामलों में प्रशासन की ओर से लंबित वेतन और विद्यावेतन का भुगतान कब तक किया जाता है, इस पर डॉक्टरों और उनके परिवारों की नजर है।