Maharashtra Jails Undertrial Prisoners: महाराष्ट्र राज्य में जेलों में कैदियों को रखने की कुल क्षमता 16,075 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में जेलों में 26,931 कैदी रह रहे हैं। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि जेलों में कैदियों की स्थिति कैसी होगी। सबसे मजेदार बात तो यह है कि विचाराधीन कैदियों की संख्या सबसे अधिक है। दोष सिद्ध कैदियों की तुलना में इनकी संख्या कई गुना अधिक है।
स्पष्ट है कि लोग न्याय के इंतजार में जेलों में बंद हैं। न तो उन्हें सजा मिल रही है और न ही छुटकारा। इसके बावजूद वे जेलों में केंद हैं। आरटीआई में संजय धूल द्वारा मांगी गई जानकारी के अनुसार नासिक जेल में इस वक्त सबसे अधिक कैदी बंद हैं।
इसके बाद मुंबई और ठाणे का नंबर आता है। नागपुर में 2,655 कैदी इस वक्त जेल में न्याय का इंतजार कर रहे हैं, जबकि नागपुर जेल की क्षमता 1,940 कैदियों को रखने की है। कुल कैदियों में 695 पुरुषों के खिलाफ ही दोष सिद्ध हुआ है, जबकि दोष सिद्ध महिला कैदियों की संख्या 17 है। अन्य 1,828 पुरुष और 39 महिला कैदी विचाराधीन हैं। इनके कारण ही जेल लबालब है और अति बारिश जैसा ओवर फ्लो' हो चुका है। ऐसे स्थानों में 'मानवीय' नीति-नियम सब फेल होना लाजमी है।
जिला जेलों की स्थिति और भी दयनीय है। राज्य के जिला जेलों की क्षमता 7,481 कैदियों को रखने की है। इसके अनुपात में दोष सिद्ध कैदियों की संख्या महज 194 कैदी जेलों में हैं लेकिन जब विचाराधीन कैदियों का नंबर आता है तो यह काफी इजाफा कर देता है।
इन जेलों में 11,096 विचाराधीन कैदी रह रहे हैं। इससे जेल एक 'कबूतरखाना' बनकर रह जाता है। अकोला जिला जेल में 695 क्षमता है, जबकि कैदियों की कुल संख्या 442, भंडारा में 343 क्षमता के अनुपात में 351 कैदी हैं, चंद्रपुर में 752 कैदी रह रहे हैं, जबकि क्षमता 462 की है।
यवतमाल जिला जेल की क्षमता 248 कैदियों की है, जबकि 536 कैदी कैद हैं। वर्धा में 252 क्षमता के एवज में 314 कैदी, बुलढाना में 101 की क्षमता है, जबकि 325 कैदी कैद हैं। वाशिम में 200 की क्षमता वाले जेल में 331 कैदी रह रहे हैं।
| जिला | क्षमता | दोष सिद्ध (पुरुष-महिला) | विचाराधीन (पुरुष-महिला) | कुल (पुरुष-महिला) |
|---|---|---|---|---|
| अमरावती | 973 | 444-8 | 722-19 | 1,989-27 |
| नागपुर | 1940 | 695-17 | 1,828-73 | 2,562-92 |
| संभाजीनगर | 1214 | 771-18 | 1,019-31 | 1,858-49 |
| नाशिक | 3208 | 876-46 | 2,755-101 | 3,691-149 |
| कोल्हापुर | 1699 | 596-7 | 1,191-59 | 1,797-68 |
| येरवडा | 2777 | 588-45 | 5,273-207 | 5,911-252 |
| मुंबई | 999 | 16-0 | 3,202-0 | 3,219-0 |
| ठाणे | 1141 | 56-1 | 2,617-125 | 2,676-126 |
| तलोजा | 2124 | 222-0 | 3,029-0 | 3,252-0 |
| कुल | 16075 | 4,264-142 | 21,636 | 26,155-763 |
न्याय या निर्णय नहीं मिल पाने के कारण जेलों में इस वक्त लगभग 32,000 से अधिक कैदी विचाराधीन अवस्था में हैं। इन कैदियों पर समय पर निर्णय हो जाता तो ये जेल के बोझ नहीं बनते लेकिन कोई तारीख पर तारीख के चक्कर में फंसा है तो कोई सबूतों के अभाव या पर्याप्त सबूत के चक्कर में जेल में कैद है। इनकी रिहाई भी नहीं हो रही है और ये दोष सिद्ध भी नहीं हो रहे हैं।
न्याय तंत्र के बीच में ये झूल रहे है। मुंबई में जेलों में बंद कैदियों के आंकड़े भी देखें तो यह दिखता है दोष सिद्ध कैदी काफी कम है, जबकि विचाराधीन कैदियों की संख्या अत्यधिक है। नागपुर जिला भी इससे अछूता नहीं है।