मौदा घर पुनर्वास (सौजन्य-नवभारत) 
नागपुर

जमीन भी गई और घर भी नहीं मिला! मौदा के कुंभारी गांव में विकास की भेंट चढ़ा ग्रामीणों का भविष्य

Kumbhari Village Mauda: मौदा के कुंभारी गांव में विकास की मार: जमीन गई पर घर नहीं मिला। एनटीपीसी बॉयलर से महज 90 मीटर दूर बसे ग्रामीणों की सेहत प्रदूषण से हो रही खराब। प्रशासन मौन।

प्रिया जैस

Mauda Tehsil News: मौदा तहसील के अंतर्गत आने वाला कुंभारी गांव आज विकास की कीमत चुकाते हुए कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। एनटीपीसी की परियोजना के लिए गांव की करीब 90 प्रतिशत कृषि भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया, लेकिन इसके बदले अब तक ग्रामीणों को न तो पूर्ण पुनर्वास मिला और न ही मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित हो पाई हैं। यही कारण है कि गांव में असंतोष और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, परियोजना का विशाल बॉयलर गांव से महज 90 मीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे लगातार उड़ने वाली धूल और राख पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले रही है। सुबह से लेकर रात तक हवा में फैली धूल के कारण लोगों का घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है। खेत-खलिहान पहले ही जा चुके हैं, अब बचा हुआ जीवन भी प्रदूषण की मार झेल रहा है।

स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर साफ दिखाई दे रहा है। गांव में सांस से जुड़ी बीमारियां, खांसी, अस्थमा, त्वचा रोग और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर देखा जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का बाहर खेलना तक मुश्किल हो गया है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ रहा है।

इसके अलावा, गांव के जल स्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई ग्रामीणों का कहना है कि पानी का रंग और स्वाद बदल गया है, जिससे पीने योग्य पानी की उपलब्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजबूरी में लोग वही पानी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा और बढ़ गया है।

वर्षों बीतने के बाद भी प्रक्रिया अधूरी

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब उनकी अधिकांश जमीन परियोजना के लिए ली जा चुकी है, तो बदले में सुरक्षित और व्यवस्थित पुनर्वास उनका अधिकार है। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया अधूरी है। न तो पुनर्वास स्थल पूरी तरह विकसित हुआ है और न ही प्रभावित परिवारों को संतोषजनक व्यवस्था दी गई है।

शिकायत करने के बाद भी ध्यान नहीं

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर संबंधित राजस्व अधिकारियों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ती जा रही हैं।

प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करने की जरूरत

पूर्व जिप सदस्य देवेंद्र गोडबोले ने कहा गांव की 90 प्रतिशत कृषि भूमि अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन आज तक पुनर्वसन नहीं हुआ। प्रदूषण और दूषित पानी के कारण गांव के लोगों का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। यह बेहद गंभीर स्थिति है और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

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