चीनी सीजन 2026-27 में देश का उत्पादन 270 से 290 लाख टन रहने का अनुमान।
कुछ आकलनों में उत्पादन 270 लाख टन तक सिमटने की आशंका जताई गई है।
घरेलू चीनी खपत 285 से 290 लाख टन रहने का अनुमान।
महाराष्ट्र में 28 अक्टूबर तक 98 चीनी मिलों में पेराई शुरू होने की जानकारी।
Maharashtra Karnataka Drought Sugarcane: देश में चालू चीनी सीजन 2026-27 के दौरान उत्पादन में गिरावट की आशंका के चलते आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं।
महाराष्ट्र-कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति के चलते पानी की कमी से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। इसका असर उत्पादन और आपूर्ति पर पड़ने वाला है। यह संभावना कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर ने जताई है।
ठक्कर के अनुसार, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई क्षेत्रों में सूखे तथा सिंचाई के पानी की कमी के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है।
उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, इस सीजन में देश का चीनी उत्पादन 270 से 290 लाख टन के बीच रह सकता है। कुछ आकलनों में उत्पादन 270 लाख टन तक सिमटने की आशंका है। पिछले सीजन की तुलना में यह गिरावट बाजार में आपूर्ति और कीमतों का संतुलन बिगाड़ सकती है।
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में पानी की किल्लत गंभीर है, जबकि सांगली और कोल्हापुर सहित पश्चिमी महाराष्ट्र के कई जिलों में भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। इसका असर न केवल मौजूदा गन्ना फसल, बल्कि अगले सीजन की खेती पर भी पड़ सकता है। पानी की कमी के चलते किसान गन्ने के बजाय मक्का और सोयाबीन जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर सकते हैं।
गन्ने की कम उपलब्धता के साथ चीनी की रिकवरी दर में गिरावट और गुड़ उद्योग की बढ़ती मांग भी उत्पादन को प्रभावित कर रही है। कोल्हापुर के आसपास कुछ किसान बेहतर भाव मिलने के कारण चीनी मिलों के बजाय गुड़ निर्माताओं को गन्ना बेच रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य में 28 अक्टूबर तक 98 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी। राज्य में लगभग 55 लाख टन गन्ने की पेराई और 7.27 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई थी।
देश में चीनी की घरेलू खपत 285 से 290 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन 270 लाख टन के आसपास रहने पर मांग और आपूर्ति में अंतर बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में आयात की जरूरत भी पड़ सकती है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा भाव 58.87 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि विभिन्न बाजारों में कीमतें 45 से 76 रुपये प्रति किलो के बीच दर्ज की गईं। ठक्कर का कहना है कि आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता, गन्ने की रिकवरी और मिलों की पेराई की गति ही चीनी की कीमतों की दिशा तय करेगी।