एमपीएससी परीक्षा, हाई कोर्ट आदेश, (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

MPSC परीक्षा पर नागपुर हाई कोर्ट का अहम अंतरिम आदेश, उम्र सीमा पार होने पर भी मौका

Nagpur MPSC Exam: नागपुर हाई कोर्ट ने MPSC परीक्षा के लिए आयु सीमा पार कर चुकी उम्मीदवार को अंतरिम राहत दी। कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया में देरी को देखते हुए आवेदन की अनुमति दी।

अंकिता पटेल

Nagpur High Court Order Age Limit Relief: नागपुर हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित परीक्षा को लेकर एक अहम अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने एक ऐसी उम्मीदवार को परीक्षा के लिए आवेदन करने की अनुमति दे दी है जिसकी आयु सीमा राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त लोक अभियोजक की नियुक्तियों में हुई देरी के कारण पार हो गई थी।

एमपीएससी को कार्यप्रणाली और इसकी वजह से आयु सीमा पार होने का हवाला देते हुए अश्विनी तायडे और अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई, याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त लोक अभियोजकों की नियुक्ति में अत्यधिक देरी हुई है और इसमें समय व्यतीत होने के कारण याचिकाकर्ता की उम्र निर्धारित कट-ऑफ आयु सीमा को पार कर गई है।

आवेदन की अंतिम तिथि 21 मई

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि MPSC ने 30 अप्रैल 2026 को विज्ञापन जारी किया था और इसके लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 21 मई 2026 तय की गई थी। समय की कमी को देखते हुए याचिकाकर्ता के हितों की रक्षा के लिए तत्काल अंतरिम राहत की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष हाई कोर्ट की मुख्य पीठ के 'मीनाक्षी सयाजी निर्भवने बनाम महाराष्ट्र राज्य' और एक अन्य खंडपीठ के फैसले (रिट याचिका संख्या 3221/2026) का हवाला दिया। मीनाक्षी निर्भवने मामले में भी 18 मार्च 2026 को जारी विज्ञापन के तहत अतिरिक्त लोक अभियोजक के पद के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। वकील ने इस मामले में भी बिल्कुल वैसे ही आदेश की प्रार्थना की।

अंतिम फैसले पर निर्भर होगी उम्मीदवारी

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने न्याय और समानता को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत प्रदान की और MPSC को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को 30 अप्रैल 2026 के विज्ञापन के अनुसार आवेदन करने की अनुमति दे।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि आवेदन पत्र स्वीकार करने मात्र से याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई 'निहित अधिकार' उत्पन्न नहीं होगा। याचिकाकर्ता की यह उम्मीदवारी पूरी तरह से इस याचिका के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगी। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 12 जून तक हलफनामा दायर करने का आदेश भी दिया।

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