नागपुर हाई कोर्ट, सोसायटी चुनाव,सदस्यता विवाद,(सोर्स: सोशल मीडिया)  
नागपुर

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: मिलिंद गृहनिर्माण सोसायटी चुनाव को मिली हरी झंडी, तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ मतदान

Nagpur High Court: नागपुर हाई कोर्ट ने मिलिंद मागासवर्गीय गृहनिर्माण सहकारी संस्था के चुनावों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और मतदान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराने की अनुमति दी।

अंकिता पटेल

Nagpur Housing Society Election: नागपुर हाई कोर्ट ने 'मिलिंद मागासवर्गीय गृहनिर्माण सहकारी संस्था लिमिटेड' की प्रबंध समिति के आगामी चुनावों पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। यह चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 जून को ही होंगे। पूरा विवाद मतदाता सूची में नाम शामिल करने को लेकर पैदा हुआ था।

याचिकाकर्ता अरुणकुमार नाइक ने सोसाइटी के चुनाव अधिकारी द्वारा 17 अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मतदाता सूची में प्रतिवादी क्रमांक 3 का नाम शामिल करने पर याचिकाकर्ता की आपत्ति को खारिज कर दिया गया था।

मतदाता सूची में नाम को लेकर मालिकाना हक पर विवाद

मालिकाना हक के पुख्ता दस्तावेज नहीं याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि प्रतिवादी नंबर 3 केवल एक 'बिक्री समझौते के आधार पर सोसाइटी की सदस्यता का दावा कर रहा है और उसके पास मालिकाना हक का कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं है।

इसलिए उसका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह खुद उस प्लॉट का असली मालिक है और मतदाता सूची में उसका नाम होना चाहिए, दूसरी ओर, प्रतिवादी क्रमांक 3 के वकील ने इन दावों का पुरजोर विरोध किया।

उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता नाना नाइक 11 अप्रैल 2008 को ही सोसाइटी की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे चुके थे। इसलिए अब याचिकाकर्ता मतदाता होने का कोई अधिकार नहीं जता सकता।

चुनाव अधिकारी का निर्णय सही

प्रतिवादी पक्ष ने अदालत के सामने 9 मई 2024 का 'हस्तांतरण पत्र' और याचिकाकर्ता के पिता द्वारा 15 दिसंबर 2008 को जारी किया गया 'लेटर ऑफ ट्रांसफर' भी पेश किया। इसके साथ ही प्रतिवादी ने बताया कि उसने अपने पक्ष में हस्तांतरित किए गए इस प्लॉट पर घर भी बना लिया है, जहां वह अपने परिवार के साथ रह रहा है और उसके नाम पर बिजली का कनेक्शन भी मौजूद है।

हालांकि याचिकाकर्ता के वकील ने इन दस्तावेजों को 'विवादित' बताते हुए इन पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और चुनाव अधिकारी के आदेश का अवलोकन करने के बाद पाया कि चुनाव अधिकारी ने प्रतिवादी क्रमांक 3 की सदस्यता से संबंधित सोसाइटी के प्रस्तावों और प्रासंगिक रिकॉर्ड्स पर उचित विचार करने के बाद ही अपना फैसला सुनाया था। तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने इस स्तर पर चुनाव प्रक्रिया पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

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