HDFC बैंक (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

HDFC बैंक के चेयरमैन ने क्यों दिया इस्तीफा? ये थी नैतिकता के पीछे की सच्चाई, नागपुर से है कनेक्शन

HDFC Bank Crisis: HDFC बैंक में भूचाल! नागपुर EOW की जांच के बाद चेयरमैन का इस्तीफा और 3 अधिकारी बर्खास्त। जानें क्या है AT-1 बॉन्ड घोटाला और नागपुर कनेक्शन।

प्रिया जैस

HDFC Banking Fraud India: देश और शेयर बाजार में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक में आए भूचाल की कहानी नागपुर में गढ़ी गई थी। नागपुर में जुलाई में हुई शिकायत को आधार मानकर ही अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 'मूल्यों और नैतिकता' का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद शेयर बाजार से लेकर बैंकिंग सेक्टर हड़कंप मच गया है। अब इसका सीधा कनेक्शन नागपुर में जुड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक ने क्रेडिट सुइस के 'एडिशनल टियर-1' (एटी-1) बॉन्ड की कथित गलत बिक्री के मामले में अपने 3 वरिष्ठ अधिकारियों को सेवा से मुक्त किया है। यह कार्रवाई तब हुई है जब इस मामले की जांच की आंच नागपुर की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) तक पहुंच चुकी है। दुबई वित्तीय सेवा प्राधिकरण (डीएफएसए) ने पहले ही बैंक की बिक्री प्रक्रिया में विफलताओं के कारण नये ग्राहक जोड़ने पर रोक लगा दी है।

ईओडब्ल्यू में जुलाई में हुई थी शिकायत

इस पूरे वैश्विक विवाद की कानूनी शुरुआत असल में नागपुर से हुई थी, जुलाई 2025 में नरेंद्र सिंगरू (एशियन डेवलपमेंट बैंक के वरिष्ठ सलाहकार) ने हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) ने नागपुर की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में पहली शिकायत दर्ज कराई थी।

एफआईआर में नाम : इस शिकायत में बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन सहित 4 वरिष्ठ अधिकारियों को नामजद किया गया था।

निवेश की राशि : नागपुर और अन्य शहरों (चंडीगढ़, गुड़गांव) के 4 निवेशकों ने मिलकर लगभग 20 से 25 करोड़ के नुकसान का दावा किया है।

एक नजर में मुख्य बिंदु

विवरण जानकारी
मुख्य शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंगरू (नागपुर ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज)।
नुकसान का अनुमान 20-30 करोड़ (स्थानीय और एनआरआई निवेशकों का कुल)।
गंभीर आरोप बिना अनुमति एफडी तोड़कर बॉन्ड में पैसा लगाना।
कानूनी स्थिति नागपुर ईओडब्ल्यू द्वारा एफआईआर और आंतरिक जांच जारी।

व्यापारियों और NRI पर असर

नागपुर के एक बड़े व्यापारी से भी धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। चूंकि नागपुर में बड़ी संख्या में एनआरआई परिवार और उच्च नेट-वर्थ वाले व्यापारी रहते हैं, इसलिए नागपुर पुलिस की ईओडब्ल्यू इस मामले में बहुत सक्रियता से जांच कर रही है। बैंक द्वारा हाल ही में की गई 3 अधिकारियों की बर्खास्तगी इसी जांच के दबाव का परिणाम मानी जा रही है।

'व्यावसायिक निवेशक' का टैग

जांच में यह भी पता चला है कि बैंक ने कथित तौर पर नियमों से बचने के लिए निवेशकों की पात्रता को धोखाधड़ी से बदल दिया। भारत में रिटेल निवेशकों को एटी-1 बॉन्ड बेचना प्रतिबंधित है, इसलिए अधिकारियों ने कथित तौर पर निवेशकों को कागजों पर 'प्रोफेशनल इन्वेस्टर' (जिनकी निवेश योग्य संपत्ति 1 मिलियन डॉलर से अधिक हो) के रूप में दिखाया, ताकि इन जटिल बॉन्ड्स की बिक्री की जा सके।

फिक्स्ड डिपॉजिट का गलत इस्तेमाल

नागपुर ईओडब्ल्यू में की गई शिकायतों में एक गंभीर आरोप यह है कि HDFC बैंक अधिकारियों ने निवेशकों की सहमति के बिना उनके फिक्स्ड डिपॉजिट को समय से पहले तोड़ दिया और उस पैसे का उपयोग इन जोखिम भरे एटी-1 बॉन्ड को खरीदने के लिए किया। निवेशकों का दावा है कि उन्हें 10-13% रिटर्न का लालच दिया गया था और जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट

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