नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय सोर्स- नवभारत
नागपुर

नागपुर मेडिकल अस्पताल का हाई-टेक मेकओवर, 11 वार्डों का कायाकल्प, बेड्स क्षमता 52% तक बढ़ी

Nagpur Medical Hospital: नागपुर के शासकीय मेडिकल अस्पताल के 11 वार्डों का आधुनिकीकरण पूरा हो गया है। मार्बल फर्श, नए टॉयलेट, कूलर्स और 143 अतिरिक्त बेड्स के साथ मरीजों को अब हाई-टेक सुविधाएं मिलेंगी।

प्रमोद यादव

GMC Nagpur Ward Renovation: नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अस्पताल के वार्डों का नवीनीकरण और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अब तक 11 वार्डों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है।

मरम्मत के बाद वाडाँ की सूरत पूरी तरह बदल गई है और मरीजों को पहले की तुलना में बेहतर वातावरण मिल रहा है। नवीनीकरण के दौरान वाडों के साथ बरामदों में भी मार्बल लगाया गया है। पुराने और खराब शौचालयों की मरम्मत कर उन्हें बेहतर बनाया गया है।

गर्मी से राहत के लिए एक वार्ड में 4 से 5 कूलर लगाए गए हैं। इसके अलावा सभी वार्डों में पंखों की व्यवस्था की गई है। बिजली की पुरानी फिटिंग को हटाकर नई इलेवट्रिकल फिटिंग की गई है। इससे वार्डों में रोशनी और बिजली व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित हुई है।

प्रति वार्ड 13 बेड की वृद्धि, लगभग 52% अधिक क्षमता

नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय की नवीनीकरण के साथ वार्डों की बेड क्षमता में भी वृद्धि की गई है। पहले एक वार्ड में करीब 25 बेड रखे जाते थे जिन्हें बढ़ाकर अब 38 बेड किया गया है। यानी प्रति वार्ड 13 बेड की वृद्धि, लगभग 52 प्रतिशत अधिक क्षमता हुई है।

11 वार्डों के हिसाब से देखें तो पहले जहां करीब 275 बेड होते थे, वहीं अब क्षमता लगभग 418 बेड तक पहुंच गई है। यानी इन 11 वार्डों में करीब 143 अतिरिक्त बेड उपलब्ध हुए हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप वाडों में मरीजों की सुविधा, पर्याप्त दूरी, स्वच्छता और आवश्यक सहायक सुविधाओं पर जोर दिया जाता है।

गंदगी और बदबू से भी राहत

नवीनीकरण के बाद वाडों का लुक पूरी तरह बदल गया है। फर्श और बरामदों में मार्बल, बेहतर शौचालय, नई बिजली फिटिंग तथा पर्याप्त हवा और रोशनी की व्यवस्था से मरीजों को साफ-सुथरा वातावरण मिल रहा है।

पहले टूटे-फूटे शौचालय और गंदगी के कारण मरीजों व परिजनों को परेशानी होती थी। अब इन समस्याओं में काफी कमी आई है। मेडिकल अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज होता है और अस्पताल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यहां प्रति दिन औसतन 90 से 120 मरीज भर्ती होते हैं।

विकास कार्यों के बाद मेडिकल की सूरत बदल रही है। इसके साथ ही मरीजों को भी बेहतर सुविधा मिल रही है। भविष्य में ऑटोनॉमस होने से सुविधाओं में और इजाफा होगा। गंदगी और बदबूभरे माहौल से मरीजों व परिजनों सहित डॉक्टरों को भी राहत मिली है। दवाइयों की भी कमी नहीं है। मरीजों को अधिकाधिक लाभ मिल सके, इस दिशा में प्रयास जारी है।
डॉ. राज गजभिये, अधिष्ठाता, मेडिकल

PM Modi 25 Years of Seva Live: जनसेवा के 25 साल पूरे, सेवा संकल्प की ली शपथ, अमित शाह ने गिनाई उपलब्धियां

पुश्तैनी संपत्ति बेचेंगे राजपाल यादव! कोर्ट में जमा किए 1.15 करोड़ के DD, बाकी रकम के लिए डेडलाइन फिक्स

Flydubai हमले के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की खोपड़ी में डिप्रेस्ड फ्रैक्चर, सऊदी में हुई थी इमरजेंसी सर्जरी

फलाहारी महाराज के दावे निकले झूठे, विराट कोहली के प्रवक्ता ने दिया जवाब, प्रेमानंद महाराज से मिलने की बताई वजह

इन 5 क्षेत्रों में कार्य कर देश को दी नई दिशा, ऐसे रहे हैं मोदी के सेवा, सुशासन और राष्ट्र-निर्माण के 25 साल