पूर्व राज्य मंत्री बच्चू कडू  सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

अमरावती DCC बैंक मामले में हाई कोर्ट सख्त, प्राथमिक जांच के आदेश, अपराध मिले तो तुरंत FIR

Nagpur High Court: अमरावती DCC बैंक में कथित करोड़ों के गबन, फर्जी प्रस्ताव और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों पर नागपुर खंडपीठ ने पुलिस को प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं। अपराध मिलने पर FIR दर्ज होगी।

प्रमोद यादव

Amravati DCC Bank Bachchu Kadu: अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (DCC बैंक) में कथित आर्थिक अनियमितताओं, फर्जी प्रस्तावों और दस्तावेजों में हेरफेर के मामले में पुलिस को प्राथमिक जांच कर आरोपों की गहन। पड़ताल करने के निर्देश बंबई हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने दिए हैं।

जांच में अपराध सामने आने पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने का भी आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि बैंक के अध्यक्ष पूर्व राज्य मंत्री बच्चू कड़ हैं। न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता रवींद्र विठ्ठलराव गायगोले और यशवंत रूपरावजी मंगरोले की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका मंजूर करते हुए यह निर्देश दिए।

नागपुर खंडपीठ ने कहा कि

नागपुर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सहकारी संस्था कानून 1908 की धारा 79 का संबंध मुख्य रूप से संस्थाओं द्वारा समय पर रिपोर्ट अथवा जानकारी प्रस्तुत नहीं करने पर उपनिबंधक की कार्रवाई से है। बैंक के धन के कथित गबन, फर्जी प्रस्ताव और रिश्तेदारों को नियमों के विपरीत कर्ज देने जैसे गंभीर आपराधिक आरोपों से इस धारा का सीधा संबंध नहीं है।

खंडपीठ ने कहा कि एक अलग याचिका में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश का निकाला। इसके चलते पुलिस थाने और आर्थिक अपराध शाखा द्वारा शुरू की गई प्राथमिक जांच रोक दी गई थी। अदालत ने इसे उचित नहीं माना।

ललिता कुमारी फैसले का हवाला

नागपुर खंडपीठ अदालत में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चर्चित 'ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' फैसले का भी उल्लेख किया, कोर्ट ने कहा कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का प्रथमदृष्ट्या संकेत मिलने पर पुलिस द्वारा प्राथमिक जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करना जरूरी है। सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों के मामलों में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए।


करोड़ों के गबन का आरोप

बंबई हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिकाकर्ता बैंक की प्रबंधन समिति के निर्वाचित संचालक है। उन्होंने 19 अक्टूबर 2025 को पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि पूर्व मंत्री सहित अन्य 8 संचालकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कथित रूप से मिलीभगत कर बैंक में करोड़ों रुपए का गबन किया।

शिकायत के बावजूद जिला उपनिबंधक के पत्र का हवाला देते हुए पुलिस जांच रोक दी गई थी। अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिक जांच किए जाने और अपराध सामने आने पर एफआईआर दर्ज किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

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