दत्ता मेघे का निधन (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नहीं रहे ‘विदर्भ के भीष्माचार्य’! CM फडणवीस समेत तमाम नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, जानें कौन थे दत्ता मेघे

Datta Meghe Death News: वरिष्ठ नेता और शिक्षा महर्षि दत्ता मेघे का निधन। विदर्भ के 'भीष्माचार्य' ने दुनिया को कहा अलविदा। वर्धा के पवनार में होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार।

प्रिया जैस

Datta Meghe Political Career: वरिष्ठ विदर्भवादी नेता और हजारों लोगों के आधार स्तंभ दत्ता मेघे के निधन से एक युग का अंत हो गया है। उनके निधन पर विभिन्न क्षेत्रों से शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। दत्ता मेघे का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रविवार रात उनके निधन की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनके निवास पर पहुंचकर अंतिम दर्शन किए।

शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उदारतापूर्वक सहयोग करने वाले मेघे के जाने से अनेक संस्थाओं ने खुद को अनाथ महसूस किया। एलआईसी में विकास अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले दत्ता मेघे ने बाद में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्ष 1978 में जब वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे तब शरद पवार ने उन्हें सीधे मंत्री पद पर नियुक्त किया था। विदर्भ में शैक्षणिक हब की नींव रखने के साथ ही सहकार और स्वास्थ्य क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने जीवन के अंतिम समय तक वरिष्ठ नागरिकों के लिए कार्य किया।

संक्षिप्त परिचय

  • जन्म : 11 नवंबर 1936, पवनार (जिला वर्धा)
  • शिक्षा : 1963 में नागपुर विश्वविद्यालय से बीए

राजनीतिक सफर :

  • 1978 से 1991 तक 3 बार तथा 2001 से 2002 तक विधान परिषद सदस्य
  • लोकसभा सदस्य : 1991 से 1996-नागपुर
  • 1996 से 1998-रामटेक
  • 1998 से 1999- वर्धा
  • 2002 से 2008- राज्यसभा सदस्य
  • 4 बार मंत्री (इनमें 2 बार बिना विधायक बने)
  • एक बार विधान परिषद में विपक्ष के नेता

संस्थाओं की स्थापना

  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों का व्यापक जाल स्थापित किया।
  • इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना।
  • नागपुर और वर्धा में अस्पतालों का निर्माण।
  • सहकारी बैंक, धागा मिल और आईटी कंपनी की स्थापना।

दातृत्व के धनी को खो दिया

वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री दत्ताभाऊ मेघे के निधन से हमने दानशीलता के एक महान प्रतीक को खो दिया है। उन्होंने शिक्षा संस्थानों का व्यापक जाल खड़ा किया और विशाल सामाजिक कार्य करते हुए अपने पूरे राजनीतिक जीवन में आम आदमी को हमेशा केंद्र में रखा।

  • देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री

निर्मल मन के नेता

दत्ता मेघे मेरे बड़े भाई जैसे थे। उनके निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनके जाने से विदर्भ के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र को बड़ी क्षति हुई है। दानशीलता से परिपूर्ण इतने बड़े और निर्मल मन के नेता का फिर से होना मुश्किल है।

  • नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री
खामला पहुंचे सीएम फडणवीस समेत तमाम नेता (सौजन्य-एक्स)

प्रतिबद्धता निभाने वाले नेता

वरिष्ठ सहयोगी और पूर्व सांसद दत्ता मेघे के निधन की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर जो संस्थाएं स्थापित कीं, वे उनकी दूरदृष्टि का जीवंत उदाहरण हैं। जनता के प्रति संवेदनशीलता, कार्यकर्ताओं को दिया गया मार्गदर्शन और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ही उनकी सच्ची पहचान थी।

  • शरद पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस

विदर्भ के भीष्माचार्य

‘विदर्भ के भीष्माचार्य’ के रूप में विख्यात शिक्षाविद दत्ता मेघे को विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव डाला। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य है।

  • एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री

आखिरी मुलाकात

विदर्भ आंदोलन हो या राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष, दत्ता मेघे का साथ हमेशा मिला। लगभग ढाई दशकों तक हमने संसद में साथ काम किया। बाबूराव तिडके के जन्मदिन पर हुई उनसे मुलाकात ही अब आखिरी साबित हुई।

  • विलास मुत्तेमवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री

‘दाताभाऊ’ एक ऋषितुल्य व्यक्तित्व

जीवनभर सेवा और दानशीलता की भावना को अपनाकर आम लोगों के मन में गहरा सम्मान और श्रद्धा पैदा करने वाले मेरे मार्गदर्शक दत्ता मेघे के निधन से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र का एक ऋषितुल्य व्यक्तित्व हमारे बीच से चला गया। सभी लोग उन्हें श्रद्धा से ‘दाताभाऊ’ कहकर पुकारते थे।

  • चंद्रशेखर बावनकुले, पालक मंत्री

लोकप्रिय जननेता को खो दिया

राज्य के वरिष्ठ नेता दत्ता मेघे के निधन की खबर दुखद है। उनके जाने से महाराष्ट्र ने एक जनोन्मुखी और लोकप्रिय नेता को खो दिया है।

  • हर्षवर्धन सपकाल, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस

समाजसेवा में अमूल्य योगदान

अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उन्होंने जनता के हित को केंद्र में रखकर कार्य किया। इसी कार्यशैली के कारण उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी। समाजसेवा में उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

  • रवींद्र चव्हाण, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा

वरिष्ठ व्यक्तित्व का निधन

आदरणीय दत्ता मेघे के निधन से सामाजिक, राजनीतिक और शिक्षा क्षेत्र में लंबे अनुभव वाला एक वरिष्ठ व्यक्तित्व हमारे बीच से चला गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

  • विजय वडेट्टीवार, कांग्रेस नेता

खो दिया जननेता

पिछले 5 दशकों से राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ने वाले जननेता एवं पूर्व सांसद दत्ता मेघे के निधन से एक जननेता हमने खो दिया।

  • नीता ठाकरे, महापौर

विदर्भ के विकास का आधार स्तंभ खो गया

राज्य के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता दत्ता मेघे के निधन से महाराष्ट्र के राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में बड़ी शून्यता उत्पन्न हो गई है। उनके जाने से विदर्भ ने अपना एक मजबूत आधार स्तंभ और मार्गदर्शक खो दिया है।

  • नितिन राऊत, पूर्व मंत्री।

सामाजिक सेवा का ‘धुरंधर’ खो गया

पूर्व सांसद दत्ता मेघे का निधन अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना है। समाजसेवा, शिक्षा और राजनीति इन तीनों क्षेत्रों में उनका कार्य अतुलनीय रहा है। वे वास्तव में अजातशत्रु थे।

  • संदीप जोशी, विधायक, विधान परिषद

अत्यंत दुखद

दत्ता मेघे के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि तथा मेघे परिवार को इस कठिन समय में ईश्वर शक्ति प्रदान करे।

  • अभिजीत वंजारी, विधायक, विधान परिषद।

एक महान वटवृक्ष धराशायी

शिक्षा महर्षि दत्ता मेघे के निधन से विदर्भ के शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र की अपूरणीय क्षति हुई है। एक महान वटवृक्ष धराशायी हो गया है। शून्य से विश्व निर्माण करने वाले बहुआयामी ‍व्यक्तित्व के धनी दत्ता मेघे ने अपनी संपत्ति 'ट्रस्ट' के रूप में जनसेवा के लिए अर्पित कर दी।

  • दयाशंकर तिवारी, शहराध्यक्ष, भाजपा

समाज का सहारा खो गया

सच्चे अर्थों में जनसेवा करने वाले दयालु हृदय के वरिष्ठ समाजसेवक दत्ता मेघे के निधन से समाज ने अपना एक बड़ा सहारा खो दिया है। वे युवाओं के मार्गदर्शक थे।

  • अतुल कोटेचा, प्रदेश महासचिव, कांग्रेस।

पवनार में होगा अंतिम संस्कार

दत्ता मेघे का पार्थिव शरीर दोपहर 1 बजे तक 135, पांडे लेआउट स्थित निवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद पार्थिव को वर्धा जिले के सावंगी मेघे क्षेत्र स्थित संकल्प बंगले में दोपहर 2.30 से 4 बजे तक दर्शनार्थ रखा जाएगा। इसके पश्चात उनकी अंतिम यात्रा पवनार स्थित उनके खेत की ओर रवाना होगी जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकी जन्मभूमि पवनार में शाम 5.30 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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