Daga Hospital Newborn Kidnapping: मां के लिए उसका बच्चा जीवन की सांस होता है। उस नन्हीं जान के स्पर्श में उसका पूरा संसार समाया होता है। नागपुर के डागा स्मृति महिला अस्पताल से महज एक दिन की नवजात बच्ची के अपहरण के बाद एक मां की आंखों में आंसू, मन में डर और दिल में असहनीय पीड़ा थी।
लेकिन उसके अक्रोश को पुलिस की संवेदनशील जांच का साथ मिला और महज 6 घंटे में उसकी नन्ही बच्ची फिर मां की गोद में लौट आई। इस घटना के पीछे भी एक दर्दनाक पहलू सामने आया है। अपनी नवजात बेटी की मौत का सदमा सहन न कर पाने के कारण मानसिक तनाव में गई एक महिला ने दूसरी मां की नवजात बच्ची को चोरी कर लिया।
एक मां के दुख से दूसरी मां के जीवन में पैदा हुआ यह अंधेरा आखिरकार पुलिस के प्रयासों से दूर हो गया, मामला डागा हॉस्पिटल का है जहां शुक्रवार को बुकांधारी महिला ने एक एक दिन की नवजात बच्ची को उसके परिजनों के सामने ही चोरी कर लिया। जानकारी के अनुसार, बच्ची को ले जाने वाली महिला खुद 3 दिन पहले ही प्रसूता हुई थी। उसने एक बच्ची को जन्म दिया था लेकिन दुर्भाग्य से उसकी बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद वह बेहद मानसिक तनाव में थी। उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसकी बच्ची फिर उसके पास है।
इसी भावनात्मक अवस्था में उसने दूसरी मां की बच्ची को अपना बनाने का चरम निर्णय लिया। वह पहले से योजना बनाकर डागा अस्पताल पहुंची। वहां उसने प्रसूता महिलाओं से कहा कि नवजात बच्चे को टीका लगवाने पर 5,000 रुपए मिलेंगे और बच्ची हासिल करने का प्रयास किया लेकिन किसी भी महिला ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया। आखिरकार उसकी नजर प्रभाशक्ति पाठराबे की नवजात बच्ची पर पड़ी।
ज्ञात हो कि गोलीबार चौक निवासी प्रभाशक्ति पाठरावे (30) ने गुरुवार को डागा अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया था। वह वार्ड क्रमांक 3 में भर्ती थी। उनकी देखभाल के लिए उनकी मां मीना खलतकर अस्पताल में थीं। शुक्रवार दोपहर करीब 12:45 बजे बुर्का पहने एक महिला वार्ड में आई। उसने बच्ची को टीका लगवाने के बहाने मीना को अपने साथ लिया।
कुछ दूरी बलने के बाद उसने उन्हें एक खिड़की के पास कतार में साड़ा किया और उनके हाथ से बच्ची अपनी गोद में रखा ती। मौना की नजर चुकते ही उक्त महिला बच्ची को लेकर गायब हो गई। काफी समय बीत जाने के बावजूद महिला वापस नहीं आई तो खलतकर ने उसकी तलाश की। महिला कहीं नहीं मिलने पर उन्होंने अस्पताल प्रशासन को जानकारी दी। इसके बाद तहसील पुलिस को घटना की सूचना दी गई।
जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध महिला की तलाश शुरू की। इस बीच वह महिला बबी को लेकर अपने घर आ गई। उसकी गोद में एक नवजात को देखकर परिजन सकते में आ गये। दूसरे की बच्ची चोरी कर लाना अपराध है, ऐसा कहते हुए परिजनों ने उसे जमकर फटकार लगाई, इसके बाद उन्होंने पुलिस थाने जाने का निर्णय लिया।
कुछ ही देर में परिकर यशोधरानगर थाने पहुंचा। पुलिस निरीक्षक से मुलाकात कर उन्होंने पूरी घटना बताई, तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना दी गई जानकारी मिलते ही तहसील पुलिस का दल यशौचरानगर क्षेत्र में पहुंचा। रात करीब 8 बजे उपनिरीक्षक संजय सिंह, हवलदार धनराज सिंगुरवार और संदीप गवली के दल ने बच्ची को अपनी सुरक्षा में लिया और उसकी असली मां प्रभाशक्ति की गोद में पहुंचा दिया।
अपनी नन्हीं बेटी को दोबारा गोद में लेते ही मां और पित्ता की आंखों से खुशी के आसू बहने लगे। कुछ घंटे पहले खोई उम्मीद की किरण फिर उनके जीवन में लौट आई। एक ओर अपहरण की घटना की जांच और दूसरी ओर एक मां की पीड़ा को समझते हुए पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों के कारण यह मामला 6 घंटे में सुलझ गया।
इस घटना ने प्रसव के बाद महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी एक बार फिर सामने ला दिया है। दुख, अवसाद और मानसिक तनाव पर समय रहते ध्यान देना कितना महत्वपूर्ण है, यह घटना स्पष्ट करती है।