नीरी 12 से 13 नए ग्रीन पटाखा फॉर्मूलेशन तैयार कर रहा है।
नए फॉर्मूलों से पारंपरिक पटाखों के मुकाबले 45 से 60 प्रतिशत तक उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य है।
अगली दिवाली तक नए ग्रीन पटाखे बाजार में लाने की दिशा में काम जारी है।
लड़ी पटाखों के उद्योग से जुड़े कारीगरों को फिर रोजगार देने की योजना है।
1,000 पटाखों वाली लड़ी के शोर को निर्धारित सीमा में लाने पर भी अनुसंधान जारी है।
NEERI Crackers Formula: नागपुर जिले में दिवाली और अन्य अवसरों पर पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती चिंताओं के बीच सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने एक बड़ी पहल की है।
नीरी ऐसे नए फॉर्मूलेशन पर काम कर रहा है जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में उत्सर्जन को 45% से 60% तक कम कर सकते हैं। इसके साथ ही संस्थान पारंपरिक लड़ी वाले पटाखों के उद्योग को भी पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है, ताकि पिछले कुछ वर्षों में रोजगार गंवा चुके कारीगरों को राहत मिल सके।
नीरी स्थित 'नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ग्रीन क्रैकर्स' के समन्वयक जोशुआ कृपादम ने जानकारी दी कि संस्थान 12 से 13 नए ऐसे फॉर्मूले तैयार कर रहा है जिनसे कम या न के बराबर दिखाई देने वाला धुआं निकलेगा।
ग्रीन पटाखे अगली दिवाली तक बाजार में इससे पहले नीरी द्वारा विकसित फॉर्मूले से 25-30% तक ही उत्सर्जन कम होता था, जबकि नए फॉर्मूले 45-60% तक प्रदूषण घटाने में सक्षम हैं।
स्पष्ट किया कि 'ग्रीन क्रैकर्स' का मतलब शून्य प्रदूषण नहीं होता बल्कि ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में काफी कम उत्सर्जन करने वाले पटाखे होते हैं।
पटाखा बाजार में 'लड़ियों का हिस्सा लगभग 20% से 30% तक होता है जो पारंपरिक रूप से हाथों या छोटे उपकरणों से बनाए जाते हैं। पिछले 5-7 वर्षों में प्रतिबंधों व नियमों के कारण इस उद्योग से जुड़े कई लोगों का रोजगार छिन गया था।
नीरी का उद्देश्य है कि नियमानुकूल और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन के जरिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इन कारीगरों को रोजगार का अवसर भी दिया जा सके।
लड़ी वाले पटाखों में एक साथ सैकड़ों हजारों पटाखों के फूटने से अत्यधिक शोर पैदा होता है। 1,000 पटाखों वाली लड़ी में शोर का स्तर लगभग 130-140 डेसिबल तक पहुंच जाता है।
जबकि निर्धारित सीमा 125 डेसिबल है। नीरी इस तेज आवाज को भी तय मानकों के भीतर लाने पर अनुसंधान कर रहा है। संस्थान का व्यापक उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से विकसित, कम उत्सर्जन वाले पटाखों को बढ़ावा देगा।